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पॉक्सो एक्ट के मामले में सुल्तान को आजीवन कारावास, 30 हजार रुपये का अर्थदंड

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सुपौल, 16 अक्टूबर (हि.स.)। जिले में नाबालिग से जुड़े पॉक्सो एक्ट के एक मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश षष्टम की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दोषी सुल्तान को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी पर 30 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। सुपौल पुलिस द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्य एवं आरोप पत्र के आधार पर यह सजा सुनाई गई है। बिहार पुलिस के सुपौल जिला पुलिस कार्यालय की ओर से 16 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में जानकारी साझा की गई।

जानकारी के अनुसार, मामला निर्मली थाना कांड संख्या 111/2022 से संबंधित है। इस मामले में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 363, 366, 368, 370, 370ए एवं 376(iii) तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 4(ii)/6 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले में अभियुक्त सुल्तान, पिता अलाउद्दीन, निवासी लालमनियां वार्ड नंबर-14, थाना मरौना, जिला सुपौल को नामजद किया गया था।

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष पुलिस की ओर से साक्ष्य एवं आरोप पत्र प्रस्तुत किए गए। इसके बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-षष्ठम, सुपौल ने मामले में फैसला सुनाते हुए अभियुक्त को आजीवन कारावास तथा 30 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। हालांकि, पुलिस की ओर से जारी सूचना में घटना की विस्तृत परिस्थितियों और सजा के अलग-अलग कानूनी प्रावधानों का विस्तार से उल्लेख नहीं किया गया है।

सुपौल पुलिस ने इस फैसले को अपराध के विरुद्ध कार्रवाई और न्यायालय में प्रभावी अभियोजन का परिणाम बताया है। पुलिस के अनुसार, जिले में अपराध नियंत्रण के साथ-साथ गंभीर मामलों में दोषियों को सजा दिलाने के लिए अनुसंधान, साक्ष्य संकलन और न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत करने की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

इस मामले में अभियोजन पदाधिकारी महेंद्र प्रसाद साह, विशेष लोक अभियोजक, सुपौल की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। न्यायालय में मामले की पैरवी और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर दोषी को सजा सुनाई गई।

पॉक्सो एक्ट बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया है। इस कानून के तहत नाबालिगों के विरुद्ध यौन अपराधों के मामलों में दोष सिद्ध होने पर कठोर दंड का प्रावधान है। ऐसे मामलों में पुलिस की जांच और अभियोजन की प्रभावी भूमिका न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण मानी जाती है।

सुपौल पुलिस ने इस कार्रवाई के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया है कि गंभीर अपराधों में दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई और न्यायालय में प्रभावी पैरवी जारी रहेगी। न्यायालय के इस फैसले को नाबालिगों के विरुद्ध अपराध से जुड़े मामलों में कानून के सख्त क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण माnना जा रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र