सुपौल में 100 साल पुरानी पांडुलिपि की खोज, ‘ज्ञान भारत मिशन’ को मिली बड़ी सफलता
सुपौल, 27 अप्रैल (हि.स.)। जिले में प्राचीन ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। ‘ज्ञान भारत मिशन’ के तहत चल रहे राष्ट्रव्यापी पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के दौरान पिपरा प्रखंड के जोल्हनियां गांव से लगभग 100 वर्ष पुरानी एक दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपि की खोज की गई है।
इस ऐतिहासिक खोज का श्रेय स्थानीय निवासी शंभू शरण चौधरी को जाता है, जिनके प्रयासों से यह धरोहर सामने आ सकी। यह पांडुलिपि गांव के ही 60 वर्षीय डोमी मंडल के घर से प्राप्त हुई, जिन्होंने अपने पूर्वजों द्वारा लिखे गए इस ग्रंथ को पीढ़ियों से सुरक्षित रखा था। उनकी यह पहल न केवल सराहनीय है, बल्कि नई पीढ़ी के लिए अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का प्रेरणादायक उदाहरण भी बन गई है।
जिला प्रशासन के सक्रिय प्रयासों से सुपौल अब प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अब तक जिले में कुल 103 पांडुलिपियों की पहचान की जा चुकी है, जिनमें से 86 को ‘ज्ञान भारतम्’ ऐप के माध्यम से डिजिटल रूप में संरक्षित कर वैश्विक स्तर पर उपलब्ध कराया गया है।
जिलाधिकारी ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके पास या उनके पूर्वजों के पास कोई भी पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपि, ग्रंथ या दस्तावेज मौजूद है, तो उसे सामने लाकर इस अभियान का हिस्सा बनें। प्रशासन का मानना है कि जनभागीदारी से ही लुप्त होती ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित किया जा सकता है।इसके लिए नागरिक ‘ज्ञान भारतम्’ ऐप के जरिए जानकारी साझा कर सकते हैं या जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। इस अभियान में योगदान देने वाले लोगों को जिला स्तर पर सम्मानित करने की भी योजना है।
यह पहल न केवल सुपौल की ऐतिहासिक पहचान को मजबूती दे रही है, बल्कि देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र

