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लंबित दाखिल-खारिज, परिमार्जन व ई-मापी मामलों को इस सप्ताह निपटाने का निर्देश

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सुपौल, 14 अगस्त (हि.स.)। जिले में राजस्व से संबंधित लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार को जिलाधिकारी सावन कुमार की अध्यक्षता में राजस्व विषयक लंबित मामलों की समीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के सभी भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, अंचल अधिकारी, राजस्व अधिकारी एवं राजस्व कर्मचारियों के कार्यों की समीक्षा की गई तथा लंबित मामलों के शीघ्र निष्पादन को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने विशेष रूप से ऑनलाइन दाखिल-खारिज, परिमार्जन, ई-मापी सहित अन्य राजस्व मामलों की अंचलवार स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि राजस्व से संबंधित लंबित मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाए। ऐसे सभी मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निष्पादन करते हुए इस सप्ताह के भीतर लंबित मामलों को निपटाने का सख्त निर्देश दिया गया।

जिलाधिकारी ने कहा कि आम लोगों से सीधे जुड़े राजस्व मामलों के निष्पादन में किसी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। दाखिल-खारिज, भूमि संबंधी अभिलेखों के परिमार्जन एवं ई-मापी जैसे कार्यों में अनावश्यक विलंब होने से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सभी संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी अपने स्तर से लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करते हुए समयबद्ध तरीके से उनका निष्पादन सुनिश्चित करें।

वासविहीन परिवारों को जल्द मिलेगा पर्चा

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने अभियान बसेरा-2 की भी समीक्षा की। उन्होंने सभी अंचल अधिकारियों को निर्देश दिया कि अभियान बसेरा-2 के तहत सर्वेक्षित सभी वासविहीन परिवारों को यथाशीघ्र पर्चा निर्गत करने की कार्रवाई पूरी की जाए। उन्होंने कहा कि जरूरतमंद एवं वासविहीन परिवारों को भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।

डीएम ने संबंधित अधिकारियों को सर्वेक्षण के बाद चिन्हित परिवारों की स्थिति की समीक्षा करते हुए पात्र लाभुकों को नियमानुसार शीघ्र पर्चा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। इसके साथ ही उन्होंने अभियान की प्रगति की नियमित निगरानी करने और निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप कार्य पूरा करने पर जोर दिया।

बैठक में राजस्व विभाग से जुड़े विभिन्न लंबित मामलों के साथ-साथ उनके निष्पादन की प्रक्रिया, अधिकारियों की जिम्मेदारी एवं समय-सीमा को लेकर भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र