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आसमान से बेरुखी, जमीन पर संकट, भागलपुर में कमजोर मानसून से धान की रोपनी पिछड़ी

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आसमान से बेरुखी, जमीन पर संकट, भागलपुर में कमजोर मानसून से धान की रोपनी पिछड़ी


भागलपुर, 18 अगस्त (हि.स.)। जिले में इस वर्ष खरीफ सीजन के दौरान मानसून की बेरुखी ने अन्नदाताओं की कमर तोड़ दी है। अमूमन हर साल 15 अगस्त तक जिले में धान की रोपनी का कार्य शत-प्रतिशत पूरा हो जाता था, लेकिन इस बार समय सीमा बीत जाने के बाद भी लक्ष्य काफी पीछे छूट गया है।

जिला कृषि कार्यालय के अनुसार, इस वर्ष 56 हजार हेक्टेयर में धान की रोपनी का लक्ष्य रखा गया था, जिसके मुकाबले अब तक केवल 89 प्रतिशत (करीब 44,306 हेक्टेयर) खेतों में ही धान की रोपाई हो सकी है। शेष 11 प्रतिशत खेत अब भी पानी के अभाव में दरारें झेल रहे हैं।

मौसम विभाग और बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर के आंकड़े बताते हैं कि इस साल जून और जुलाई के शुरुआती हफ्तों में मानसून पूरी तरह से कमजोर रहा। जून महीने में जहां सामान्य रूप से 183 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, वहां महज 45 मिलीमीटर (70% कम) ही बारिश दर्ज की गई।

जुलाई के शुरुआती दिनों में भी यही हाल रहा। इसके चलते किसानों के बिचड़े (नर्सरी) खेतों में ही सूखने लगे। हालांकि, अगस्त के मध्य में हुई कुछ छिटपुट और हल्की बारिश ने झुलसती फसलों को थोड़ी राहत दी है, लेकिन यह भारी कमी को पूरा करने के लिए नाकाफी है। कमजोर मानसून के बीच किसानों को सबसे बड़ा झटका सरकारी सिंचाई व्यवस्था से लगा है।

जिले के कुल 345 सरकारी नलकूपों में से 134 नलकूप लंबे समय से बंद या ठप पड़े हैं। ऐसे में छोटे और सीमांत किसानों के पास सिंचाई का कोई और साधन नहीं बचा है। संपन्न किसानों ने निजी डीजल पंप और बोरिंग के सहारे जैसे-तैसे रोपाई तो की, लेकिन लगातार गिरते भूजल स्तर और महंगे डीजल के कारण खेती की लागत दोगुनी से ज्यादा बढ़ चुकी है। लगातार सूखे की स्थिति को देखते हुए भागलपुर के कई प्रखंडों के किसानों ने इस बार अपनी रणनीति बदल ली है। धान की खेती में पानी की भारी जरूरत को देखते हुए, किसानों ने रोपाई रोकने के बजाय खाली पड़े खेतों में अरहर की बुआई को प्राथमिकता दी है।

कृषि विभाग के अनुसार, जून-जुलाई में बारिश न होने के कारण जिले में अरहर का बुआई लक्ष्य धान की रोपाई से पहले ही पूरा कर लिया गया, क्योंकि इसे बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है। बीएयू, सबौर के मौसम वैज्ञानिकों ने किसानों को सचेत करते हुए कहा है कि अब लंबी अवधि वाले धान की रोपाई का समय निकल चुका है।

किसान अब केवल कम अवधि (110-120 दिन) में तैयार होने वाली धान की किस्मों को ही प्राथमिकता दें। खेतों में उपलब्ध पानी को रोकने के लिए मेड़बंदी मजबूत करें। जहां रोपाई हो चुकी है, वहां हल्की बारिश के तुरंत बाद उचित मात्रा में यूरिया का छिड़काव करें ताकि पौधों का विकास तेजी से हो सके।

जिन खेतों में पानी की व्यवस्था बिल्कुल नहीं हो पा रही है, वहां धान की ज़िद छोड़ मक्का, उड़द या अन्य मोटे अनाजों की बुआई करें। स्थानीय किसान यूनियनों ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि भागलपुर जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने पर विचार किया जाए और बंद पड़े सभी 134 सरकारी नलकूपों को युद्धस्तर पर ठीक कराकर बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर