जनजातीय संस्कृति और अधिकारों की रक्षा को लेकर किशनगंज से 400 से अधिक लोग दिल्ली रवाना
किशनगंज, 22 मई (हि.स.)। जनजातीय संस्कृति, परंपरा और अधिकारों की रक्षा की मांग को लेकर किशनगंज से 400 से अधिक लोगों का जत्था शुक्रवार को दिल्ली के लिए रवाना हुआ।
यह जत्था जनजाति सुरक्षा मंच के बैनर तले आयोजित होने वाली जनजाति गर्जना रैली में भाग लेने जा रहा है। शहर के गांधी चौक से बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएं और युवा पारंपरिक वेशभूषा एवं सांस्कृतिक प्रतीकों के साथ दिल्ली के लिए निकले। गांधी चौक पर सुबह से ही जनजातीय समुदाय के लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। पारंपरिक परिधानों, वाद्ययंत्रों और सांस्कृतिक पहचान के साथ उपस्थित लोगों ने पूरे माहौल को जनजातीय रंग में रंग दिया। रैली में शामिल होने जा रहे लोगों ने कहा कि दिल्ली में आयोजित होने वाला जनजातीय सांस्कृतिक समागम देशभर के विभिन्न जनजातीय समुदायों को एक मंच पर लाने का प्रयास है। इसका उद्देश्य जनजातीय समाज की संस्कृति, परंपराओं, रीति-रिवाजों और अधिकारों के संरक्षण को लेकर एकजुटता प्रदर्शित करना है।
जनजाति सुरक्षा मंच से जुड़े सदस्यों ने बताया कि उनकी प्रमुख मांगों में संविधान के अनुच्छेद 342 में संशोधन कर धर्मांतरित व्यक्तियों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) सूची से हटाने के लिए संसद में विधेयक लाना शामिल है। मंच का कहना है कि धर्मांतरण के बाद भी एसटी आरक्षण और सरकारी लाभ लेने की व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
संगठन ने मांग की कि धर्मांतरित व्यक्तियों को एसटी प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव लड़ने और सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने से रोका जाए, ताकि वास्तविक जनजातीय समुदाय को आरक्षण एवं संवैधानिक सुरक्षा का लाभ मिल सके। इसके साथ ही मंच ने धर्मांतरण पर रोक लगाने तथा जनजातीय धर्म, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की। दिल्ली रवाना होने से पहले गांधी चौक पर मौजूद लोगों ने जनजातीय एकता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत बनाए रखने का संकल्प भी लिया।
हिन्दुस्थान समाचार / धर्मेन्द्र सिंह

