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चैती छठ महापर्व पर श्रद्धालुओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को दिया अर्घ्य

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चैती छठ महापर्व पर श्रद्धालुओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को दिया अर्घ्य


सहरसा, 24 मार्च (हि.स.)। चैत शुक्ल पक्ष में आयोजित कठिन चैती छठ के अवसर पर प्रकृति के साक्षात व प्रत्यक्ष देवता, सृष्टि संचालक भगवान भास्कर की पूजा अर्चना व लोक आस्था का महापर्व चैती छठ का मंगलवार को सायंकालीन अर्घ्य दिया गया। बुधवार को प्रातः कालीन अर्घ्य के साथ चैती छठ पर्व का समापन होगा।

चार दिवसीय छठ महापर्व के संध्या अर्घ्य शहर के शंकर चौक सहित अन्य घाट एवं घरों में भगवान भास्कर को श्रद्धालुओं ने अर्घ्य दिया। विधि-विधान से सूर्योपासना एवं अर्घ्य के बाद व्रतियां व श्रद्धालु अपने-अपने घरों की ओर लाैटे। लोक आस्था का महापर्व छठ का शुभारंभ 22 मार्च को नहाय खाय के साथ शुरू हुआ था। इसके अगले दिन 23 मार्च को खरना का व्रतियों ने व्रत रखा। खरना पूजा के बाद 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत शुरू हुआ। वही मंगलवार की शाम छठ घाटों पर व्रतियों ने अस्तांचलगामी सूरज को अर्घ्य दिया।

छठ व्रतियों ने हाथ में सूप लिए पूजन किया। अगल-बगल खड़े परिवार के सदस्यों ने लोटे में जल एवं दूध भरकर सूर्य देवता को अर्घ्य दिया। जो पानी के अंदर नहीं पहुंच सके, वो सभी एक के पीछे एक कतार में खड़े हो एक दूसरे को स्पर्श कर अर्घ्य देने की प्रक्रिया पूरी की। कोई पानी से तो कोई दूध से अर्घ्य देते दिखे। समितियों द्वारा श्रद्धालुओं को अर्घ्य के लिए गाय का दूध व अगरबत्ती भी दी गयी। छठ व्रतियों ने बताया कि चैती छठ में व्रतियों के लिए काफी विकट समय रहता है। उसके वाबजूद लोग पुरे नियम निष्ठा श्रद्धा, विश्वास एवं समर्पण के साथ मनाते हैं। जिसके कारण षष्ठी माता एवं सुर्य भगवान की कृपा से पुरे परिवार में सुख शांति, समृद्धि तथा धन्य धान व संतान की प्राप्ति होती है।

हिन्दुस्थान समाचार / अजय कुमार