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वासंती नवरात्रि के चौथे दिन गायत्री शक्तिपीठ में माता श्री कुष्मांडा स्वरूप व मां गायत्री का पूजन

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वासंती नवरात्रि के चौथे दिन गायत्री शक्तिपीठ में माता श्री कुष्मांडा स्वरूप व मां गायत्री का पूजन


सहरसा, 22 मार्च (हि.स.)। गायत्री शक्तिपीठ में नवरात्र के चतुर्थ दिवस पर आदि शक्ति मां कुष्मांडा का विधि-विधान पूर्वक पूजन हुआ। पूजन मनीषा,अंजलि ने करवाई पूजन के क्रम में डाक्टर अरुण कुमार जायसवाल ने कहा-माता कुष्मांडा के पूजन से समस्त विघ्नो का नाश होता है,निर्णय क्ष्मता का विकास होता है।ईर्ष्या से उदारता की ओर तथा लोभ से संतोष की ओर उर्जा का गमन होता है।लोभ ,और मोह का नाश होता है।दिव्य तेज की प्राप्ति होती है।परम तेज की प्राप्ति होती है।परम तेज को धारण करने की क्ष्मता होती है।पूजन का कर्मकांड शक्तिपीठ की देव कान्या ने करवाई।कर्मकांड के मुख्य यजमान आनंद चेतन सपत्नी थे।

इस अवसर पर विभिन्न संस्कार हुए यथा-पूंसवन संस्कार,विद्यारम्भ संस्कार, गायत्री मंत्र की दीक्षा संस्कार एवं अन्नप्राशन संस्कार हुए। संस्कार परंपरा के महत्व को बताते हुए डाक्टर अरुण कुमार ने कहा-इस प्रकार के संस्कार से व्यक्तित्व विकास की प्रक्रिया संपन्न होती है।इससे पूर्व संध्या कालीन सत्र में भजन, कीर्तन,युग संगीत के साथ साथ मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम कथा के प्रसंग में माता सीता के स्वाभिमान,त्याग और कर्तव्य दुर्लभ प्रसंग की चर्चा हुई।

इस अवसर पर भूतपूर्व राॅव पदाधिकारी राकेश कुमार, ललन कुमार सिंह, हरेकृष्ण साह, नवलसिंह, दिनेश कुमार दिनकर, स्नेह लता तिवारी सुनीता चौधरी के साथ साथ शक्तिपीठ के युवा मंडल, महिला मंडल के साथ साथ सभी परिजन उपस्थित थे।

हिन्दुस्थान समाचार / अजय कुमार