जीवित बुजुर्ग को रिकॉर्ड में दिखाया मृत, वर्षों तक बंद रही वृद्धावस्था पेंशन
सुपौल, 05 जुलाई (हि.स.)।
जिले के किशनपुर प्रखंड से प्रशासनिक लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां सरकारी अभिलेखों में एक जीवित बुजुर्ग को मृत घोषित कर दिए जाने के कारण उनकी सामाजिक सुरक्षा पेंशन वर्षों तक बंद रही।
पेंशन बहाल कराने के लिए बुजुर्ग लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिल सकी।मामला किशनपुर प्रखंड की परसा माधो पंचायत के कलिमगुरा वार्ड संख्या-3 निवासी 65 वर्षीय बेचू पासवान का है।
उन्हें इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना का लाभ मिल रहा था। लेकिन जीवन प्रमाणीकरण नहीं होने के आधार पर सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत दर्ज कर दिया गया और उनकी सामाजिक सुरक्षा पेंशन का भुगतान रोक दिया गया।
काफी समय तक अधिकारियों के पास गुहार लगाने के बाद मामला अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के समक्ष पहुंचा। शिकायत के बाद पूरे मामले की जांच कराई गई।
जांच में स्पष्ट हुआ कि बेचू पासवान पूरी तरह जीवित हैं और उन्हें मृत घोषित किया जाना तथ्यात्मक रूप से गलत था। जांच रिपोर्ट में इसे संबंधित कर्मियों की गंभीर लापरवाही माना गया।
जांच रिपोर्ट के आधार पर अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने किशनपुर के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) को लाभार्थी का जीवन प्रमाणीकरण कराकर उनकी सामाजिक सुरक्षा पेंशन तत्काल पुनः शुरू कराने का निर्देश दिया है। साथ ही भविष्य में इस तरह की त्रुटि दोबारा नहीं हो, इसके लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।
यह मामला सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के क्रियान्वयन में बरती जा रही लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि समय रहते शिकायत नहीं की जाती, तो एक जीवित बुजुर्ग लंबे समय तक सरकारी सहायता से वंचित रह सकते थे। अब प्रशासन के निर्देश के बाद बेचू पासवान को दोबारा पेंशन मिलने की उम्मीद जगी है।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि सरकारी रिकॉर्ड में छोटी-सी चूक भी किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन पर बड़ा असर डाल सकती है।
हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र

