जांच एवं उपचार चिकित्सा आपके द्वार’ अभियान का शुभारंभ, घर-घर होगी गैर संचारी रोगों की स्क्रीनिंग
कटिहार, 02 सितंबर (हि.स.)। जिले में गैर संचारी रोगों की समय रहते पहचान और मुफ्त उपचार सुनिश्चित करने के लिए बुधवार को “जाँच एवं उपचार चिकित्सा आपके द्वार” महाभियान का विधिवत शुभारंभ हुआ। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस राज्यव्यापी अभियान की शुरुआत की। 30 नवंबर 2026 तक संचालित होने वाले इस अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर पहुंचकर लोगों की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग करेंगी।
शुभारंभ के दौरान कटिहार एनआईसी सभागार से जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी, पूर्व उपमुख्यमंत्री व कटिहार सदर विधायक तारकिशोर प्रसाद, प्राणपुर विधायक निशा सिंह, कोढ़ा विधायक कविता देवी तथा सिविल सर्जन डॉ. जितेन्द्र कुमार सहित कई प्रशासनिक व स्वास्थ्य अधिकारी जुड़े। इस अवसर पर कटिहार समाहरणालय परिसर में विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर भी लगाया गया।
जिले के स्वास्थ्य संस्थान को प्रतिदिन न्यूनतम 50 स्क्रीनिंग का लक्ष्य दिया गया है। अभियान के तहत आशा और एएनएम घर-घर जाकर प्रत्येक परिवार का ‘फैमिली फोल्डर’ तैयार करेंगी। कम्युनिटी बेस्ड असेसमेंट चेकलिस्ट के आधार पर उच्च जोखिम वाले लोगों को चिन्हित कर उनका डेटा मोबाइल एनसीडी एप पर दर्ज किया जाएगा।
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में 30 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी व्यक्तियों का बीएमआई (लंबाई-वजन) मापने के साथ उच्च रक्तचाप, मधुमेह, ओरल-स्तन-गर्भाशय कैंसर, हृदय रोग, नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर और सीओपीडी जैसी बीमारियों की जांच की जाएगी।
अभियान के तहत संदिग्ध मरीजों की पुष्टि के लिए अस्पतालों में सीबीसी, ब्लड शुगर, एचबीएलसी, लिपिड प्रोफाइल, लिवर व किडनी फंक्शन टेस्ट, ईसीजी, पैप स्मीयर, बायोप्सी और थायराइड समेत कई महत्वपूर्ण जांचों की सुविधा दी जा रही है। जरूरतमंद मरीजों को टेली-कंसल्टेशन के जरिए विशेषज्ञ डॉक्टरों का परामर्श और 30 दिनों की आवश्यक दवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। गंभीर मरीजों को उच्चतर स्वास्थ्य केंद्रों में रेफर करने की व्यवस्था की गई है।
सिविल सर्जन डॉ. जितेन्द्र कुमार ने बताया कि अभियान का उद्देश्य केवल जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि नियमित दवा और फॉलोअप सुनिश्चित करना है। आशा कार्यकर्ता मरीजों को हर महीने स्वास्थ्य केंद्र आने के लिए प्रेरित करेंगी। पूरे अभियान की दैनिक मॉनिटरिंग जिलाधिकारी के स्तर से की जाएगी, जबकि जिला गैर संचारी रोग पदाधिकारी को नोडल पदाधिकारी बनाया गया है। समय पर पहचान और जीवनशैली में बदलाव से असामयिक मौतों को रोकने में यह अभियान मील का पत्थर साबित होगा।
हिन्दुस्थान समाचार / विनोद सिंह

