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सुपौल के 7 वर्षीय गीतांक आयुष ने नेशनल लेवल के कराटे में जीता स्वर्ण पदक, छोटी उम्र में रचा इतिहास

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सुपौल के 7 वर्षीय गीतांक आयुष ने नेशनल लेवल के कराटे में जीता स्वर्ण पदक, छोटी उम्र में रचा इतिहास


सुपौल, 28 जून (हि.स.)। जिले के एक छोटे से गांव रामपुर के रहने वाले सात वर्षीय बालक गीतांक आयुष ने अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के दम पर बड़ी उपलब्धि हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है।

अजय कुमार के पुत्र गीतांक आयुष ने नेशनल लेवल के जूनियर कराटे चैंपियनशिप-2026 में अंडर-25 वेट कैटेगरी में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया है।

महज सात वर्ष की उम्र में कराटे प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर आयुष ने न सिर्फ अपने गांव और जिले बल्कि पूरे बिहार और देश का गौरव बढ़ाया है।

गीतांक आयुष की इस उपलब्धि की खबर जैसे ही गांव पहुंची, पूरे रामपुर में खुशी की लहर दौड़ गई। गांव के लोगों ने इसे अपनी उपलब्धि मानते हुए नन्हे खिलाड़ी का भव्य स्वागत किया। जब आयुष अपने गांव पहुंचा तो ग्रामीणों ने फूल-माला पहनाकर उसका अभिनंदन किया और सम्मान समारोह आयोजित कर उसे सम्मानित किया।

समारोह में बड़ी संख्या में ग्रामीण, बच्चे और आसपास के लोग शामिल हुए।सम्मान समारोह के दौरान ग्रामीणों ने कहा कि गीतांक आयुष ने कम उम्र में जिस तरह का प्रदर्शन किया है, वह पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है।

लोगों ने कहा कि गांव की मिट्टी में भी प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। अगर बच्चों को सही मार्गदर्शन और बेहतर अवसर मिले तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।

गीतांक आयुष के स्वर्ण पदक जीतने से उसके परिवार में भी खुशी का माहौल है।

पिता अजय कुमार ने बताया कि आयुष बचपन से ही खेल के प्रति काफी रुचि रखता था। कराटे सीखने के दौरान उसने नियमित अभ्यास और अनुशासन के साथ अपनी प्रतिभा को निखारा।

परिवार के सहयोग और आयुष की मेहनत का परिणाम है कि आज उसने इतनी बड़ी सफलता हासिल की है।

ग्रामीणों ने बताया कि आयुष हमेशा कुछ नया सीखने के लिए उत्साहित रहता है। उसकी मेहनत और लगन देखकर गांव के अन्य बच्चे भी प्रेरित हो रहे हैं।

लोगों का कहना है कि आयुष की सफलता आने वाली पीढ़ी के बच्चों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और वे भी खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होंगे। जूनियर कराटे चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतना आयुष के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इतनी छोटी उम्र में प्रतियोगिता के दबाव को संभालते हुए बेहतर प्रदर्शन करना उसकी प्रतिभा और आत्मविश्वास को दर्शाता है।

आयुष ने अपनी मेहनत से यह साबित कर दिया है कि सफलता हासिल करने के लिए उम्र नहीं बल्कि मेहनत, लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति जरूरी होती है। सम्मान समारोह में मौजूद लोगों ने आयुष को भविष्य में और बड़ी उपलब्धियां हासिल करने की शुभकामनाएं दीं।

दूर-दूर से पहुंचे लोगों ने नन्हे खिलाड़ी को आशीर्वाद दिया और कहा कि वह आगे चलकर देश के लिए भी पदक जीतने का सपना पूरा करे। गांव के लोगों ने प्रशासन और समाज से भी अपील की कि ऐसे प्रतिभावान बच्चों को प्रोत्साहन और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाएं आगे आ सकें।

उन्होंने कहा कि खेल के क्षेत्र में बच्चों को बेहतर प्रशिक्षण और संसाधन मिलने से वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।

गीतांक आयुष की सफलता ने यह संदेश दिया है कि प्रतिभा किसी शहर या बड़े संस्थान की मोहताज नहीं होती। छोटे-छोटे गांवों से भी ऐसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी निकल सकते हैं, जो अपने प्रदर्शन से पूरे देश का नाम रोशन कर सकते हैं। रामपुर गांव का यह नन्हा सितारा आज पूरे सुपौल जिले के लिए गर्व का विषय बन गया है और लोगों को उम्मीद है कि आयुष भविष्य में भी इसी तरह सफलता के नए मुकाम हासिल करता रहेगा।

हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र