हरियल प्रजाति के पक्षी की रहस्यमयी मौत, जांच की मांग तेज
भागलपुर, 20 जून (हि.स.)। जिले के कहलगांव क्षेत्र से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। प्रकृति प्रेमियों और ग्रामीणों को उस समय गहरा झटका लगा जब श्यामपुर पंचायत इलाके में दुर्लभ हरियल पक्षी मृत अवस्था में पाया गया। विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुके इस अनोखे पक्षी की अचानक हुई मौत ने लोगों को हैरान और दुखी कर दिया है।
पर्यावरणविद दीपक कुमार सिंह ने बताया कि पिछले कई माह से भागलपुर के विभिन्न हिस्सों से इस विलुप्त पक्षी के अकाल मौत की सूचना मिलती रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, गांव के समीप पेड़ों के नीचे करीब आधा दर्जन हरियल पक्षी मृत पड़े मिले। सूचना मिलते ही इलाके में सनसनी फैल गई।
भाजपा नेता रणवीर सिंह ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि पक्षियों की मौत कैसे हुई, इसका फिलहाल कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। आशंका जताई जा रही है कि तेज गर्मी, जहरीले रसायन या पर्यावरणीय बदलाव इसकी वजह हो सकते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि हरियल पक्षी वर्षों बाद इस इलाके में दिखाई दिए थे। ऐसे में अचानक इनकी मौत ने वन्यजीव प्रेमियों की चिंता बढ़ा दी है। लोगों ने प्रशासन और वन विभाग से मामले की जांच कर दुर्लभ पक्षियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। हरियल, जिसे हरिल, होरील या हरा कबूतर भी कहा जाता है, अपने अनोखे स्वभाव और आकर्षक रंग के कारण पक्षी जगत में खास पहचान रखता है। यही पक्षी महाराष्ट्र का राजकीय पक्षी भी है।
हल्के हरे रंग का यह पक्षी पीले पैरों और पंखों पर सुनहरी धारियों के कारण बेहद खूबसूरत दिखता है। इसकी आंखों के चारों ओर गुलाबी घेरा और कंधों पर बैंगनी-लाल धब्बा इसकी पहचान मानी जाती है। सामान्यतः यह करीब 33 सेंटीमीटर लंबा और लगभग 225 ग्राम वजनी होता है।
हरियल को लेकर सबसे रोचक मान्यता यह है कि यह जीवनभर जमीन पर पैर नहीं रखता। पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार यह पूरी तरह वृक्षवासी होता है और अपना अधिकांश जीवन पीपल, बरगद, गूलर तथा अंजीर जैसे ऊंचे पेड़ों पर ही बिताता है। भोजन, विश्राम, घोंसला और यहां तक कि पानी की जरूरत भी यह पेड़ों पर जमी ओस से पूरी कर लेता है।
ग्रामीण लोककथाओं में यह भी कहा जाता है कि यदि हरियल कभी जमीन पर उतरता है तो पैरों में लकड़ी दबाकर बैठता है। हालांकि वैज्ञानिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह मान्यता आज भी ग्रामीण इलाकों में प्रचलित है।
हरियल केवल सुंदर पक्षी ही नहीं, बल्कि पर्यावरण का महत्वपूर्ण प्रहरी भी माना जाता है। यह फल खाकर बीजों को दूर-दूर तक फैलाता है, जिससे नए पौधों और पेड़ों का जन्म होता है। इस तरह जंगलों के विस्तार और जैव विविधता को बनाए रखने में इसकी बड़ी भूमिका रहती है। यह पक्षी आमतौर पर झुंड में रहना पसंद करता है और इसकी मधुर सीटी जैसी आवाज जंगलों की शांति में अलग पहचान बनाती है। मादा को आकर्षित करने के लिए नर हरियल का विशेष नृत्य भी देखने लायक होता है।
कहलगांव में हरियल पक्षियों की मौत के बाद स्थानीय लोगों ने वन विभाग से तत्काल जांच कराने की मांग की है।
पर्यावरणविदों का कहना है कि यदि समय रहते कारणों का पता नहीं लगाया गया तो यह दुर्लभ प्रजाति क्षेत्र से पूरी तरह गायब हो सकती है। ग्रामीणों का मानना है कि हरियल का दिखना शुभ संकेत माना जाता है, लेकिन अब इनकी मौत ने इलाके में उदासी और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।
हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

