सीतामढ़ी स्टेशन पर मोबाइल गुम होने के आठ दिन बाद भी नहीं मिला कोई सुराग, बैंक खाते से अनधिकृत यूपीआई निकासी का आरोप
दरभंगा, 25 जुलाई (हि.स.)। दरभंगा जिले के घनश्यामपुर प्रखंड अंतर्गत लालापट्टी गांव निवासी माला देवी के पति मुक्ति शर्मा ने अपनी पत्नी का मोबाइल गुम होने के बाद बैंक खाते से कथित रूप से हुई अनधिकृत यूपीआई निकासी के मामले में शीघ्र कार्रवाई की मांग की है।
घटना के आठ दिन बीत जाने के बावजूद न तो मोबाइल का कोई सुराग मिल पाया है और न ही कथित रूप से निकाली गई राशि की रिकवरी हो सकी है। इससे परिवार आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक तनाव का भी सामना कर रहा है।
मुक्ति शर्मा ने बताया कि 17 जुलाई 2026 को उनकी पत्नी माला देवी ट्रेन से यात्रा कर रही थीं। इसी दौरान सीतामढ़ी रेलवे स्टेशन के समीप उनका मोबाइल फोन गुम हो गया। मोबाइल में एयरटेल का सिम लगा था तथा उसका मॉडल रियलमी नार्जो एन-65 (5जी) था। घटना के तुरंत बाद ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई गई तथा 18 जुलाई को दिल्ली स्थित आनंद विहार रेलवे पुलिस स्टेशन में लिखित आवेदन दिया गया। इस पर रेलवे पुलिस ने जनरल डायरी संख्या 0010ए दर्ज कर मामले को क्षेत्राधिकार के आधार पर आगे की कार्रवाई के लिए जीआरपी समस्तीपुर को भेज दिया।
मुक्ति शर्मा के अनुसार, मोबाइल गुम होने के कुछ ही समय बाद उनकी पत्नी के बैंक खाते से कई संदिग्ध यूपीआई लेन-देन किए गए। इसके बाद माला देवी ने उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक की पररी जेडेपट्टी शाखा में आवेदन देकर पूरे मामले की जांच की मांग की। आवेदन में संदिग्ध लेन-देन का पूरा विवरण, यूटीआर नंबर, लाभार्थी खातों की जानकारी, केवाईपी, आईपी एड्रेस, डिवाइस आईडी एवं लॉगिन हिस्ट्री सुरक्षित रखते हुए संबंधित जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराने तथा संबंधित खातों को फ्रीज कर राशि की रिकवरी की कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है।
मुक्ति शर्मा ने कहा कि घटना के तुरंत बाद पुलिस और बैंक को सूचना देने के बावजूद अब तक न तो मोबाइल बरामद हो सका है और न ही कथित रूप से निकाली गई राशि वापस मिल सकी है। उन्होंने कहा कि लगातार संबंधित अधिकारियों और बैंक से संपर्क करने के बावजूद मामले में अपेक्षित प्रगति नहीं होने से परिवार खुद को असहाय महसूस कर रहा है।
उन्होंने रेलवे पुलिस, जीआरपी समस्तीपुर, साइबर अपराध शाखा तथा बैंक प्रबंधन से मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित जांच कर दोषियों की पहचान करने, मोबाइल बरामद कराने और कथित रूप से निकाली गई धनराशि वापस दिलाने की मांग की है।
उल्लेखनीय है कि साइबर धोखाधड़ी के मामलों में समय पर कार्रवाई को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में शिकायत दर्ज होने के कई दिन बाद भी यदि न मोबाइल का पता चल सके और न ही संदिग्ध लेन-देन पर ठोस कार्रवाई की जानकारी मिले, तो यह पीड़ित परिवार की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। फिलहाल सभी की निगाहें संबंधित जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर टिकी हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / Krishna Mohan Mishra

