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मैथिली सभी वर्गों और जातियों की मातृभाषा है : मो. हारुन रशीद

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मैथिली सभी वर्गों और जातियों की मातृभाषा है : मो. हारुन रशीद


मैथिली सभी वर्गों और जातियों की मातृभाषा है : मो. हारुन रशीद


सुपौल, 03 अक्टूबर (हि.स.)। आगामी जनगणना में मैथिली को मातृभाषा के रूप में दर्ज कराने के उद्देश्य से मैथिली भाषा-भाषियों की प्रतिनिधि संस्था चेतना समिति की ओर से शनिवार को सुपौल स्थित नितमाया विवाह भवन में जन-जागरूकता सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे बुद्धिजीवियों, जनप्रतिनिधियों, साहित्यकारों और मैथिली आंदोलन से जुड़े लोगों ने भाग लिया। वक्ताओं ने लोगों से जनगणना के दौरान अपनी मातृभाषा के रूप में मैथिली दर्ज कराने को लेकर जागरूकता फैलाने की अपील की।

सभा की अध्यक्षता करते हुए बिहार विधान परिषद के पूर्व सभापति मो. हारुन रशीद ने कहा कि मैथिली मिथिला क्षेत्र में रहने वाले सभी वर्गों, जातियों और धर्मों के लोगों की मातृभाषा है। लोग अपने घर-परिवार में सहज रूप से मैथिली में संवाद करते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को मातृभाषा में बातों को समझने और सीखने में भी आसानी होती है। भाषा बोलने वालों की वास्तविक संख्या का आकलन सुनिश्चित करने के लिए आगामी जनगणना में लोगों को अपनी मातृभाषा के रूप में मैथिली दर्ज करानी चाहिए। उन्होंने इस अभियान में महिलाओं की विशेष भागीदारी का आह्वान किया।

सभा में विभिन्न वक्ताओं ने चेतना समिति की पहल की सराहना करते हुए जागरूकता अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने पर जोर दिया। जदयू नेता युगल किशोर अग्रवाल ने भाषाई पहचान के संरक्षण के लिए अभियान को महत्वपूर्ण बताया। पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष नागेंद्र कुमार ठाकुर ने जनप्रतिनिधियों से अभियान में सहयोग करने की अपील की।

कांग्रेस नेता मो. मिन्नत रहमानी ने कहा कि अभियान को जिले के गांव-गांव तक पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सुपौल जिले के मुस्लिम समुदाय के लोग भी दैनिक जीवन में मैथिली का प्रयोग करते हैं। इसलिए जनगणना के दौरान मातृभाषा के रूप में मैथिली दर्ज कराने को लेकर लोगों के बीच जागरूकता जरूरी है।

चेतना समिति के अध्यक्ष विवेकानंद झा ने कहा कि सुपौल सहित मिथिला के इस क्षेत्र में रहने वाले लोग जिस भाषा का दैनिक जीवन में प्रयोग करते हैं, वही मैथिली का वास्तविक स्वरूप है। उन्होंने कहा कि अपनी मां की भाषा को संरक्षित करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

जागरण यात्रा के संयोजक दिनेश चंद्र झा ने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए अतिथियों का स्वागत किया। समिति के उपाध्यक्ष उमेश मिश्र ने विषय प्रवेश कराते हुए जागरण यात्रा की रूपरेखा, उद्देश्य और जनभागीदारी के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने लोगों से अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की।

सभा को डॉ. कुलानंद झा, जयप्रकाश चौधरी, साहित्यकार रघुनाथ मुखिया, चेतना समिति के उपाध्यक्ष विप्रेन्द्र झा ‘माधव’, शिशिर चंद्र मिश्र, धर्मेंद्र मिश्र, मनोज पाठक सहित अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया। वक्ताओं ने मैथिली भाषा के संरक्षण और संवर्धन को लेकर अपने सुझाव रखे।

सभा के दौरान उपस्थित लोगों ने मैथिली भाषा के संरक्षण, संवर्धन तथा आगामी जनगणना में मातृभाषा के रूप में मैथिली दर्ज कराने को लेकर व्यापक जन-जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र