महिषी संस्कृति परम्परा एक दीपमाला शिखर समान है : शंकराचार्य
सहरसा, 29 अप्रैल (हि.स.)।
विश्वविख्यात दार्शनिक मीमांसक,अद्वैत वेदान्ती पंडित मंडन मिश्र के कर्म स्थली महिषी पहुंचे कांची कामकोटि पीठ के पीठाधीश्वर ने बुधवार को सनातन प्रेमियों को सम्बोधित किया। शंकराचार्य विजयेन्द्र सरस्वती ने अपने सम्बोधन में कहा कि भारतीय वैदिक परम्परा में महिषी का ऐतिहासिक महत्व है।
महिषी संस्कृति परंपरा दीप माला शिखर के रूप में विख्यात है। जहां स्वयं आदि शंकराचार्य को सनातन धर्म रक्षार्थ आना पड़ा। उन्होंने कहा कि बनारस में एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी मुख्य अतिथि थे जहां उन्होंने बिहार के सन्दर्भ में महत्वपूर्ण बात की। उन्होंने कहा कि मठ के महराज जी भी बिहार के लिए समर्पित रहें इसलिए बिहार में बौद्धिक एवं सांस्कृतिक विकास को बढ़ावा देने के लिए विद्या,वेद,और वैद्य के क्षेत्र में काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अभी कोई धोषणा नही लेकिन पूर्व मीमांसा के लिए प्रतिवर्ष यहां सेमिनार का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म को मानने वाले लोगों की संख्या बिहार में सबसे अधिक है और भारतीय संस्कृति परम्परा विश्व में सबसे अनुकरणीय है।उन्होंने मैथिली भाषा की मधुरता का जिक्र करते पूर्व प्रधानमंत्री स्व वाजपेयी को कोट किया।
उन्होंने कहा कि मंडन धाम की समग्र विकास के लिए यहां एक आधुनिक चिकित्सा केन्द्र का होना आवश्यक है जिसके लिए यहां के लोग सम्पर्क में रहेंगे भविष्य यहां के विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। मंडन धाम महिषी में आयोजित एक दिवसीय महाचंडी यज्ञ एवं हवन कार्यक्रम के दौरान पीठाधीश्वर का भव्य स्वागत किया गया। जहां ग्रामीणों की ओर से प्राचार्य डा नंदकिशोर चौधरी उनके आगमन पर अभिनंदन पत्र समर्पित किया।सम्बोधन उपरांत स्वामी विजयेन्द्र सरस्वती जी ने मंडन धाम पर स्नान करने के वाद दैनिक पुजा पाठ किए फिर भगवती उग्रतारा मंदिर में वैदिक रीति-रिवाज से पूजन किया।
हिन्दुस्थान समाचार / अजय कुमार

