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पत्नी सहित पुत्र को भी जलाकर मारने के आराेप में कोर्ट ने सुनाई आजीवन कारावास

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पत्नी सहित पुत्र को भी जलाकर मारने के आराेप में कोर्ट ने सुनाई आजीवन कारावास


मधेपुरा, 18 सितंबर (हि.स.)।दहेज के लिए पत्नी और एक साल के पुत्र को जिंदा जलाकर हत्या करने के करीब डेढ़ दशक पुराने मामले में मधेपुरा व्यवहार न्यायालय ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। एडीजे-3 रघुवीर प्रसाद की अदालत ने मामले में दोषी पति रूपेश मेहता को भारतीय दंड संहिता की धारा 304बी के तहत आजीवन कारावास और 40 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं धारा 304ए के तहत भी 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई है। अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर छह माह के साधारण कारावास का भी प्रावधान किया गया है।

मामले में अन्य आरोपियों महानंद मेहता, मनोज मेहता और प्रदीप मेहता को भी अदालत ने दोषी करार देते हुए तीन-तीन वर्ष के कारावास और 10-10 हजार रुपये आर्थिक दंड की सजा सुनाई।

दहेज के लिए प्रताड़ना का लगाया था आरोप

मामला वर्ष 2010 में मधेपुरा जिले के श्रीनगर थाना में दर्ज किया गया था। मृतका कारी देवी के पिता सत्यनारायण मेहता ने पुलिस को दिए आवेदन में बताया था कि उनकी बेटी की शादी वर्ष 2005 में रूपेश मेहता के साथ हुई थी। शादी के शुरुआती दिनों में दांपत्य जीवन सामान्य रहा, लेकिन बाद में दहेज में विभिन्न सामान की मांग को लेकर कारी देवी को कथित रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा।

आवेदन के अनुसार, दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर मामला गंभीर होता गया और अंततः कारी देवी पर किरासन तेल डालकर आग के हवाले कर दिया गया मौत के बाद शव को जलाया गया और उसी चिता पर एक वर्षीय पुत्र को भी जला दिया ।

करीब डेढ़ दशक बाद आया फैसला

इस मामले में पूर्व में ही तीन आरोपिताें को सजा सुनाई जा चुकी है। शुक्रवार को पति रूपेश मेहता सहित अन्य आरोपिताें के संबंध में अदालत ने सजा सुनाई। लंबे समय से चल रहे इस मामले में फैसला आने के बाद मृतका के परिजन को न्याय मिलने की उम्मीद को मजबूती मिली है।

अपर लोक अभियोजक ने दी जानकारी

मामले की जानकारी देते हुए अपर लोक अभियोजक रमेश मेहता ने बताया कि अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और मामले की सुनवाई के बाद दोषियों को सजा सुनाई है। उन्होंने बताया कि दहेज हत्या जैसे गंभीर मामले में न्यायालय द्वारा कठोर सजा दिया जाना महत्वपूर्ण है।

न्यायालय परिसर में फैसले की चर्चा

फैसला सुनाए जाने के बाद मधेपुरा व्यवहार न्यायालय परिसर में भी इस मामले की चर्चा होती रही। लंबे समय बाद आए इस फैसले को दहेज प्रथा के खिलाफ एक महत्वपूर्ण न्यायिक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / Prashant Kumar