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सत्ता नहीं, संपूर्ण व्यवस्था परिवर्तन था जेपी का ध्येय: अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा ने मनाई लोकनायक की 124वीं जयंती

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कटिहार, 11 अक्टूबर (हि.स.)। अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा (बिहार राज्य जिला शाखा, कटिहार) के कार्यालय में रविवार को संपूर्ण क्रांति के प्रणेता लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 124वीं जयंती सादगी एवं श्रद्धापूर्वक मनाई गई। जिलाध्यक्ष अरविंद पटेल की अध्यक्षता में आयोजित समारोह में वक्ताओं ने जेपी के विचारों को कालजयी बताते हुए कहा कि उनका वास्तविक उद्देश्य महज सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि संपूर्ण सामाजिक व प्रशासनिक व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन लाना था। कार्यक्रम की शुरुआत उपस्थित गणमान्य लोगों द्वारा लोकनायक के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर की गई।

समारोह को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए अपर लोक अभियोजक सह प्रदेश संगठन मंत्री विनोद कुमार (अधिवक्ता) ने कहा कि जेपी के मन में सत्ता का कोई लोभ नहीं था; वे जन-जन से जुड़े सच्चे जननायक थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकनायक 'पॉवर टू द पीपल' (लोकशक्ति) और 'राइट टू रिकॉल' जैसे लोकतांत्रिक सिद्धांतों के प्रबल पैरोकार थे। केवल सरकारों के बदलने से समाज का उत्थान संभव नहीं है, बल्कि संपूर्ण व्यवस्था में बदलाव ही क्रांति की असली कसौटी है।

अध्यक्षीय वक्तव्य में जिलाध्यक्ष अरविंद पटेल ने कहा कि 1974 के ऐतिहासिक छात्र-आंदोलन के बाद देश में सत्ता परिवर्तन तो हुआ, परंतु व्यवस्था परिवर्तन का संकल्प आज भी अधूरा है। 11 अक्टूबर 1902 को जन्मे जेपी का जीवन राष्ट्र के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा और वर्तमान युवा पीढ़ी को उनके उच्च आदर्शों, संघर्षों व जीवन-मूल्यों को आत्मसात करने की जरूरत है।

समारोह में वरीय अधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद, श्याम देव राय, रामविलास पासवान, प्रभात देवी, दिलीप राय तथा रमाकांत राय सहित कई अधिवक्ताओं व समाजसेवियों ने लोकनायक के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विचार रखे एवं उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

हिन्दुस्थान समाचार / विनोद सिंह