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डॉ. लोहिया के विचार सामाजिक न्याय और समानता के लिए आज भी प्रासंगिक

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डॉ. लोहिया के विचार सामाजिक न्याय और समानता के लिए आज भी प्रासंगिक


दरभंगा, 12 अक्टूबर (हि.स.)।

डॉ. राम मनोहर लोहिया की 70वीं पुण्यतिथि पर सोमवार को लहेरियासराय स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया चौक पर समारोह आयोजित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। सामाजिक न्याय और समाजवाद के समर्थकों ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनके विचारों को याद किया।

इस अवसर पर राजद के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री ललित कुमार यादव, उमेश राय, उदय शंकर चौधरी, सुभाष पासवान, रामबृक्ष यादव, डॉ. प्रो. राम बाबू चौपाल, डॉ. प्रो. कुंदन महतो, मो. मोरशिद हसन, गंगा राम गोप, कृष्ण कुमार यादव और राधा देवी सहित कई लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।

इसके बाद अपराह्न 2 बजे दरभंगा थियोसोफिकल लॉज के एम टैंक परिसर में उमेश राय की अध्यक्षता में विचार गोष्ठी आयोजित हुई। ‘वर्तमान समय में डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचारों की प्रासंगिकता’ विषय पर वक्ताओं ने उनके सामाजिक दर्शन और समाजवादी विचारधारा पर प्रकाश डाला।

अध्यक्षीय संबोधन में उमेश राय ने कहा कि डॉ. लोहिया समाजवाद के अग्रदूत थे। उन्होंने जीवनभर वंचित वर्गों के उत्थान, लोकतंत्र, समानता और सामाजिक गैर-बराबरी को समाप्त करने के लिए संघर्ष किया। उनके विचार आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

डॉ. प्रो. राम बाबू चौपाल ने उनके सामाजिक दर्शन को वर्तमान परिस्थितियों में प्रासंगिक बताया, जबकि डॉ. प्रो. कुंदन महतो ने विश्व परिवार की उनकी परिकल्पना पर चर्चा की। रामबृक्ष यादव ने कहा कि समतामूलक समाज की स्थापना के बिना वंचित वर्गों का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है।

सुभाष पासवान ने डॉ. लोहिया के नारे ‘पिछड़ा पावे सौ में साठ’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसने वंचित वर्गों में सामाजिक अधिकारों के प्रति चेतना जगाई। शनिचर पासवान, संजीव कुमार चौधरी और अनिल बिहारी सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने डॉ. लोहिया के बताए सामाजिक न्याय, समानता और समाजवाद के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / Krishna Mohan Mishra