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योग से विकसित भारत का सपना होगा साकार : कुलपति

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योग से विकसित भारत का सपना होगा साकार : कुलपति


दरभंगा, 13 जुलाई (हि.स.)। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (एलएनएमयू) के दर्शनशास्त्र विभाग के तत्वावधान में जुबिली हॉल में सोमवार को भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद (आईसीपीआर), शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित हाइब्रिड राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

संगोष्ठी का विषय था योग के माध्यम से आरोग्य एवं आनंद : भारतीय ज्ञान-परंपरा की अंतर्निहित प्रज्ञा। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी ने की।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की समग्र पद्धति है। योग हमें कर्म को ही धर्म मानने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने कहा कि यदि योग को जन-जन तक पहुंचाया जाए और जीवन का हिस्सा बनाया जाए तो वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का सपना साकार हो सकता है। योग लोभ, मोह, क्रोध, भय, तनाव और मानसिक अशांति पर नियंत्रण का प्रभावी माध्यम है तथा तन, मन और आत्मा के समन्वय का विज्ञान है। उन्होंने विश्वविद्यालय में एनएसएस और आर्ट ऑफ लिविंग के सहयोग से पांच दिवसीय योग एवं व्यक्तित्व विकास शिविर आयोजित करने का निर्देश भी दिया।

मुख्य वक्ता मगध विश्वविद्यालय की पूर्व प्रतिकुलपति एवं दर्शनशास्त्र विभाग की पूर्वाध्यक्ष प्रो. कुसुम कुमारी ने कहा कि मिथिला सदैव विद्वानों की भूमि रही है और योग हमारी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग है। योग आत्मशुद्धि, मन पर नियंत्रण और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है तथा व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाता है।

बेनीपुर विधायक प्रो. विनय कुमार चौधरी ने कहा कि बिहार की योग परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है। नियमित योगाभ्यास से शरीर स्वस्थ, मन स्थिर और स्मरण शक्ति प्रखर होती है। उन्होंने विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर एवं विज्ञान शिक्षा के विस्तार के लिए कुलपति द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

आर्ट ऑफ लिविंग के बिहार प्रभारी आनंद प्रकाश राय ने सकारात्मक सोच और मानसिक संतुलन के लिए योग की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए विश्वविद्यालय में पांच दिवसीय योग शिविर आयोजित करने की सहमति दी। वहीं, विशिष्ट वक्ता डॉ. रुद्रकांत अमर ने कहा कि संपूर्ण भगवद्गीता योगमय है और गीता का संदेश कर्म में कुशलता तथा जीवन में संतुलन स्थापित करना है।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन, कुलगीत एवं स्मारिका विमोचन के साथ हुआ। विभागाध्यक्ष डॉ. शिखर वासिनी ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि डॉ. आर.एन. चौरसिया ने धन्यवाद ज्ञापन किया। संगोष्ठी के चार तकनीकी सत्रों में 200 से अधिक शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। संयोजक डॉ. प्रियंका राय ने बताया कि देश के विभिन्न राज्यों से 425 से अधिक शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से सहभागिता की। सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र भी प्रदान किए जाएंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / Krishna Mohan Mishra