अल नीनो के असर से बचाव के लिए किसानों को कृषि वैज्ञानिकों की सलाह, धान के विकल्प अपनाने की अपील
बक्सर, 19 जुलाई (हि.स.)।
मानसून की कमजोर स्थिति और अल नीनो के प्रभाव को देखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भा.कृ.अनु.प.) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना तथा कृषि विज्ञान केंद्र, बक्सर ने किसानों के लिए विशेष कृषि परामर्श जारी किया है। वैज्ञानिकों ने बताया कि जुलाई के पहले 16 दिनों में बिहार में सामान्य से लगभग 43 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार 18 से 20 जुलाई के बीच राज्य के कई हिस्सों में मध्यम से भारी वर्षा होने की संभावना है, लेकिन पूरे जुलाई माह में सामान्य से कम बारिश और अधिक तापमान का पूर्वानुमान बना हुआ है।
वैज्ञानिकों ने किसानों को कम पानी वाली परिस्थितियों में धान के स्थान पर अरहर, मक्का और रागी जैसी वैकल्पिक फसलों की खेती अपनाने की सलाह दी है। अरहर की उन्नत किस्मों की बुवाई, मेड़-नाली विधि तथा मिश्रित खेती को भी लाभदायक बताया गया है। बीजोपचार के लिए राइजोबियम, पीएसबी और ट्राइकोडर्मा अथवा 2 प्रतिशत पोटाश (केसीएल) घोल के उपयोग की अनुशंसा की गई है।
धान की खेती करने वाले किसानों को 18–25 दिन पुराने पौधों की रोपाई, 15×15 सेंटीमीटर दूरी रखने, 'वैकल्पिक गीला एवं सूखा' सिंचाई पद्धति अपनाने तथा खेत में केवल आवश्यकता पड़ने पर सिंचाई करने की सलाह दी गई है। खेत की मेड़ों को मजबूत बनाने, वर्षा जल संचयन के लिए गड्ढा बनाने और मल्चिंग अपनाने पर भी जोर दिया गया है।
कृषि वैज्ञानिकों ने जैविक खाद, वर्मीकंपोस्ट और संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि यूरिया का प्रयोग एक साथ करने के बजाय 3–4 किस्तों में करें। सूखे के तनाव से फसलों को उबारने के लिए 2 प्रतिशत यूरिया या एनपीके घोल का पर्णीय छिड़काव करने की भी अनुशंसा की गई है। साथ ही धान की फसल में समय पर खरपतवार नियंत्रण के लिए उपयुक्त खरपतवारनाशियों के प्रयोग की सलाह दी गई है।
कृषि विज्ञान केंद्र, बक्सर ने किसानों से अपील की है कि वे मौसम पूर्वानुमान पर लगातार नजर रखें और वैज्ञानिकों द्वारा सुझाए गए उपाय अपनाकर अल नीनो के संभावित प्रभाव से अपनी फसलों को सुरक्षित रखें।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / Jitendra Mishra

