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झालमुरी बेचने वाले के बेटे ने रचा इतिहास: भागलपुर के प्रिंस का भारतीय पेनकैक सिलाट टीम में चयन

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झालमुरी बेचने वाले के बेटे ने रचा इतिहास: भागलपुर के प्रिंस का भारतीय पेनकैक सिलाट टीम में चयन


भागलपुर, 29 अक्टूबर (हि.स.)। प्रतिभा किसी सुविधा की मोहताज नहीं होती और अगर हौसलों में उड़ान हो, तो आर्थिक तंगी भी रास्ता नहीं रोक सकती। इसकी मिसाल भागलपुर के प्रिंस कुमार ने पेश की है। झालमुरी बेचकर परिवार का भरण-पोषण करने वाले एक साधारण पिता के बेटे प्रिंस ने अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का मुकाम हासिल किया है। बिहार बाल भवन किलकारी, भागलपुर में कई वर्षों से प्रशिक्षण ले रहे प्रिंस कुमार का चयन भारतीय पेनकैक सिलाट टीम में हुआ है। अब वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने खेल का जौहर दिखाकर बिहार और भागलपुर का नाम रोशन करने की तैयारी में हैं।

प्रिंस की इस अभूतपूर्व उपलब्धि को लेकर किलकारी बिहार बाल भवन के कंपनीबाग परिसर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस दौरान कराटे प्रशिक्षक एवं किलकारी से जुड़े पदाधिकारियों ने प्रिंस की सफलता की जानकारी साझा की। उनकी इस उपलब्धि से संस्थान के साथ-साथ पूरे जिले में खुशी का माहौल है। प्रिंस की सफलता उन तमाम युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं और उन्हें पूरा करने का जज्बा रखते हैं।

प्रिंस के प्रशिक्षक कुंदन कुमार ने बताया कि प्रिंस बेहद मेधावी और मेहनती खिलाड़ी हैं। उन्होंने अपनी प्रतिभा और लगातार अभ्यास के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। हालांकि, प्रिंस के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, ऐसे में उन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भेजना एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। प्रशिक्षक ने शहर के गणमान्य लोगों, समाजसेवियों और खेल प्रेमियों से अपील की है कि वे आगे आएं। उन्होंने कहा कि चंदा जुटाकर प्रिंस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के लिए भेजने का प्रयास किया जाएगा। उन्हें पूरा विश्वास है कि प्रिंस देश और भागलपुर का नाम वैश्विक पटल पर चमकाएंगे।

किलकारी के पदाधिकारी साहिल राज ने भी प्रिंस के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उम्मीद जताई कि प्रिंस आने वाले समय में और बेहतर प्रदर्शन करेंगे। वहीं, प्रिंस के पिता दीपक मंडल ने भावुक होकर बताया कि वह झालमुरी बेचकर अपने परिवार का जीवनयापन करते हैं। सीमित आमदनी होने के बावजूद उन्होंने अपने बेटे के सपनों को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास किया और कभी उसकी हिम्मत टूटने नहीं दी। उन्हें पूरी उम्मीद है कि उनका बेटा आगे भी बेहतरीन प्रदर्शन करेगा और परिवार के साथ-साथ पूरे देश का गौरव बढ़ाएगा। अब जरूरत है प्रिंस के हौसलों को आर्थिक सहयोग देने की, ताकि झालमुरी बेचकर परिवार चलाने वाले पिता का बेटा अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का तिरंगा शान से लहरा सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर