भगत सिंह की जयंती पर पीस सेंटर परिधि ने कला केंद्र में किया संगोष्ठी का आयोजन
भागलपुर, 28 सितंबर (हि.स.)। स्थानीय कला केंद्र में सोमवार को पीस सेंटर परिधि द्वारा शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने भगत सिंह के क्रांतिकारी जीवन के साथ-साथ उनके सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक दर्शन पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीस सेंटर के संयोजक राहुल ने कहा कि भगत सिंह ने एक ऐसे स्वतंत्र भारत का सपना देखा था जहाँ नीतियाँ समाज के अंतिम व्यक्ति को ध्यान में रखकर बनाई जाएं। वे देश में समाजवाद की स्थापना करना चाहते थे। संस्कृति कर्मी उदय ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि भगत सिंह का अध्ययन सिर्फ राजनेताओं के लिए ही नहीं, बल्कि कलाकारों, कवियों और नाटककारों के लिए भी बेहद जरूरी है। गांधी और भगत सिंह के विचारों में कोई विरोध नहीं था, बल्कि दोनों के रास्ते अलग थे।
मृदुला सिंह ने कहा कि बेहद कम उम्र में भगत सिंह ने देश को जो राह दिखाई, वह आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है। दीपक कुमार मंडल और चन्दन कुमार ने भगत सिंह के दार्शनिक पहलुओं और उनके प्रसिद्ध लेख मैं नास्तिक क्यों हूँ का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भगत सिंह युवाओं को धर्म, जाति और अंधविश्वास से ऊपर उठकर तर्क और विज्ञान के आधार पर सोचने के लिए प्रेरित करते थे। वे देश को न केवल अंग्रेजों से, बल्कि पूंजीपतियों और जमींदारों के शोषण से भी आजाद देखना चाहते थे।
मोहम्मद बाकीर ने कहा कि उनके लिए देशभक्ति का मतलब हर नागरिक को शोषण से मुक्त कराना था। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने भगत सिंह के तर्कशीलता, न्याय, बराबरी और सम्मान के विचारों पर चलते हुए एक बेहतर समाज गढ़ने का संकल्प लिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

