home page

कालजयी कथाकार भीष्म साहनी की जयंती मनी

 | 
कालजयी कथाकार भीष्म साहनी की जयंती मनी


भागलपुर, 08 अगस्त (हि.स.)। साहित्य सफर द्वारा चित्रकला सदन नयाबाजार मंदरोजा में शनिवार को कालजयी कथाकार भीष्म साहनी की 111वीं जयंती मनाई गई। जिसकी अध्यक्षता संस्था के संस्थापक अध्यक्ष जगतराम साह कर्णपुरी ने की।

जयंती समारोह का शुभारंभ कथाकार भीष्म साहनी के तैल चित्र के सामने दीप प्रज्ज्वलित कर संतोष ठाकुर अनमोल ने किया। उपस्थित अन्य साहित्यकारों और कवियों ने भी चित्र पर पुष्प अर्पित कर भीष्म साहनी को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। तदुपरांत अपने उद्बोधन में संतोष ठाकुर अनमोल ने कहा कि भीष्म साहनी एक आदर्श रचनाकार थे। तात्पर्य यह है कि वे एक अच्छे लेखक के साथ-साथ एक अच्छे आदमी थे। भीष्म साहनी एक ऐसे साहित्यकार थे जिनके साहित्य में अतीत और वर्तमान का समन्वय है।

मुख्य अतिथि साहित्यकार विजय कुमार मंडल ने कहा कि भीष्म साहनी जैसे लेखक का एक बड़ा अर्थ होता है। भीष्म साहनी एक प्रतिबद्ध लेखक थे। भीष्म साहनी प्रगतिशील साहित्य के पुरोधा थे। भीष्म साहनी प्रेमचंद परंपरा के प्रसिद्ध कथाकार माने जाते हैं। जयंती समारोह की अध्यक्षता करते हुए जगतराम साह कर्णपुरी ने कहा कि भीष्म साहनी जी का कथा संसार व्यापक लोकतांत्रिक संवेदना,लोकमानस और मानवीय करुणा से जुड़ा है।

उन्होंने इप्टा नाटक मंडली से जुड़कर नाटकों को नई दिशा दी। भीष्म साहनी वामपंथी विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध लेखक थे। भीष्म साहनी देश विभाजन की त्रासदी के विशिष्ट लेखक थे। उनका प्रथम कहानी संग्रह भाग्यरेखा 1953 में और कालजयी उपन्यास तमस 1970 में प्रकाशित हुआ था। इसके अलावा जयंती समारोह को डॉ संजय कुमार, अवधेश शर्मा, रंजन कुमार राय,गोपाल महतो, अरुण बाजोरिया, इंद्रजीत सहाय ने भी संबोधित किया।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर