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कम लागत में अधिक पैदावार, धान की खेती में समेकित कीट प्रबंधन अपनाने की अपील

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कम लागत में अधिक पैदावार, धान की खेती में समेकित कीट प्रबंधन अपनाने की अपील


कटिहार, 02 अगस्त (हि.स.)। जिला कृषि विभाग ने धान की खेती करने वाले किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी करते हुए रासायनिक कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से बचने की अपील की है। विभाग ने किसानों से कहा है कि वे खेत के प्राकृतिक जैविक संतुलन को बनाए रखने के लिए मित्र कीटों का संरक्षण करें, जो बिना किसी खर्च के प्राकृतिक रूप से शत्रु कीटों का सफाया करते हैं।

जिला कृषि पदाधिकारी-सह-परियोजना निदेशक आत्मा राजीव कुमार ने स्पष्ट किया है कि धान के खेतों में मकड़ी, लेडीबर्ड बीटल, ग्रीन लेसविंग, ड्रैगन फ्लाई और परजीवी ततैया जैसे अनेक प्राकृतिक शिकारी मित्र कीट मौजूद होते हैं। अत्यधिक रासायनिक कीटनाशकों के छिड़काव से ये लाभकारी जीव नष्ट हो जाते हैं, जिससे कुछ ही दिनों बाद हानिकारक कीटों की संख्या पहले से अधिक तेजी से बढ़ने लगती है—इस स्थिति को कीट पुनरुत्थान यानी पेस्ट रिसर्जेंस कहा जाता है। इसके अलावा, अधिक रसायनों के प्रयोग से मिट्टी, जल और पर्यावरण प्रदूषण के साथ-साथ उत्पादन लागत भी बढ़ती है।

कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेत का नियमित निरीक्षण करें तथा आर्थिक क्षति स्तर यानी ईटीएल पहुँचने पर ही, वह भी शाम के समय, अनुशंसित मात्रा में कीटनाशकों का छिड़काव करें। किसानों से प्रकाश प्रपंच, फेरोमोन ट्रैप और पीले चिपचिपे ट्रैप का उपयोग करने की अपील की गई है। संतुलित उर्वरक प्रबंधन, उचित पौध दूरी और समेकित कीट प्रबंधन के सिद्धांतों को अपनाकर किसान कम लागत में बेहतर और सुरक्षित पैदावार प्राप्त कर सकते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / विनोद सिंह