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कटिहार में स्वरोजगार और औद्योगिक प्रगति: युवाओं के लिए खुल रहे विकास के नए द्वार

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कटिहार, 16 अगस्त (हि.स.)। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री के कुशल नेतृत्व में कटिहार जिला विकास के नए आयामों की ओर निरंतर अग्रसर है। जिला प्रशासन से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, जिले में युवाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने हेतु व्यापक स्तर पर रोजगार सृजन कार्यक्रमों और औद्योगिक ढाँचें को मजबूत करने का कार्य प्रभावी रूप से किया जा रहा है।

वित्तीय सहायता और स्वरोजगार योजनाएं:

जिले के युवाओं को नया उद्योग स्थापित करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके तहत, वित्तीय वर्ष 2025–26 में 'स्वरोजगार एवं उद्यमिता विकास योजना' के अन्तर्गत कुल 231 लाभार्थियों का चयन किया गया है। विभाग द्वारा इन चयनित लाभार्थियों को प्रशिक्षण प्रदान करने के साथ ही, आर्थिक रूप से अनुदानित दर पर 10–10 लाख रूपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

इसके अतिरिक्त, गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों को अपना व्यवसाय प्रारंभ करने हेतु 2 लाख रूपये तक की वित्तीय सहायता देने का प्रावधान है। इस योजना के अंतर्गत कटिहार में गत वर्ष 2 हजार 217 लाभार्थियों का चयन किया गया, जिनमें से 1 हजार 771 लाभार्थियों को प्रथम किस्त के रूप में 50–50 हजार रूपये की राशि डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की जा रही है।

सूक्ष्म एवं लघु उद्योग को बढ़ावा:

सूक्ष्म, लघु एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में तकनीकी, वित्तीय व विपणन सहायता उपलब्ध कराने हेतु केंद्रीय और राज्य स्तरीय योजनाओं का सुचारू क्रियान्वयन जारी है। 'प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना' के तहत 108 और 'प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम' के तहत 36 लाभार्थियों का चयन किया गया है। इन उद्यमियों को बैंकों के माध्यम से ऋण और सब्सिडी उपलब्ध कराई गई है।

औद्योगिक निवेश और प्रशिक्षण:

कटिहार में बड़े उद्योगपतियों और निवेशकों को आकर्षित करने के लिए राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड के माध्यम से प्रशासनिक सहयोग, भूमि व आवश्यक सुविधाएँ प्राथमिकता पर दी जा रही हैं। वर्तमान में जिले में लगभग 12 से 13 औद्योगिक इकाईयाँ सक्रिय रूप से कार्यरत हैं, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही हैं।

उद्यमियों को कुशल बनाने हेतु 'रैम्प' कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है, जिसका लक्ष्य 2 हजार से अधिक उद्यमियों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण देना है। इसमें स्वयं सहायता समूह की 'जीविका दीदियों' को विशेष रूप से शामिल किया जा रहा है, ताकि वे सूक्ष्म उद्यम शुरू कर सकें।

कृषि–आधारित उद्योगों पर फोकस:

जिला उद्योग विभाग कृषि–आधारित उद्योगों, विशेषकर मखाना, जूट और खाद्य प्रसंस्करण की अपार संभावनाओं को देखते हुए कार्य कर रहा है। इन क्षेत्रों में मूल्य संवर्द्धन तथा स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान व उचित मूल्य दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही, स्टार्टअप बिहार व स्टार्टअप इंडिया जैसी योजनाओं के माध्यम से युवाओं को नए व्यावसायिक विचारों को धरातल पर उतारने का अवसर मिल रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / विनोद सिंह