सारण में ज्ञान भारतम् योजना से सहेज जाएगा ऐतिहासिक धरोहर
सारण, 25 फ़रवरी (हि.स.)। जिले की पुरातात्विक और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और उनके अस्तित्व को सुरक्षित रखने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय समिति की बैठक में जिले की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर कई निर्णय लिए गए।
बैठक में ‘ज्ञान भारतम’ योजना पर विशेष बल दिया गया। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि जिले के अभिलेखागार, जयप्रकाश विश्वविद्यालय, पुराने मठ-मंदिरों, मदरसों, संस्कृत महाविद्यालयों और प्रबुद्ध शिक्षाविदों के पास उपलब्ध दुर्लभ पांडुलिपियों का पता लगाकर उनका डिजिटाइजेशन कराया जाए। इसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को उनकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखना है। छपरा संग्रहालय परिसर स्थित पुराने जर्जर 'ढाई आखर भवन' को ध्वस्त कर वहाँ एक अत्याधुनिक वीआर फैसिलिटी बनाने की योजना है। इसके माध्यम से पर्यटक डिजिटल माध्यम से जिले के गौरवशाली इतिहास का आभासी दर्शन कर सकेंगे।
छपरा के मगाईडीह स्थित ऐतिहासिक डच मकबरा स्थल को एक वृहत पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव विभाग को भेजा जाएगा। जिसमें आधुनिक संग्रहालय, एम्फीथियेटर का निर्माण, स्थानीय कलाकृतियों के लिए स्टॉल, एक्टिविटी सेंटर, पर्यटकों के लिए फूड कोर्ट और पार्किंग की सुविधा होगी।पुरातात्विक स्थल चिरांद को गंगा के कटाव से बचाने के लिए किनारे पर बोल्डर पिचिंग और रिटेनिंग वाल के निर्माण का निर्णय लिया गया है।
साथ ही स्थल की वैज्ञानिक सफाई और बफर जोन के लिए जमीन अधिग्रहण की पहल की जाएगी। पर्यटकों के लिए यहाँ स्थायी गाइड और सुरक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित होगी। नई पीढ़ी को इतिहास से रूबरू कराने के लिए स्कूली छात्र-छात्राओं को शैक्षणिक परिभ्रमण के तहत चिरांद और छपरा संग्रहालय का भ्रमण कराया जाएगा। जिलाधिकारी ने अन्य पुराने धार्मिक स्थलों के विकास के लिए संबंधित एसडीओ से भी प्रस्ताव मांगे हैं। बैठक में सदर अनुमंडल पदाधिकारी, जिला कला संस्कृति पदाधिकारी, छपरा संग्रहालय के अपर निदेशक सह संग्रहालयाध्यक्ष विमल तिवारी, जेपी यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग के डॉ कृष्ण कन्हैया सहित और अधिकारी मौजूद थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय कुमार

