बगहा -02 प्रखंड के पंचायतों में लगाये गये जिम उपकरण बने कबाड़
पश्चिम चम्पारण (बगहा), 08 जुलाई(हि.स.)।बगहा अनुमंडल के बगहा-2 प्रखंड की पंचायतों में ग्रामीणों को स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से लगाए गए जिम उपकरण अब सवालों के घेरे में हैं। पंचायत समिति की ओर से कराए गए विकास कार्यों के तहत खरीदे और लगाए गये इन उपकरणों की वर्तमान स्थिति देखकर ग्रामीणों में सरकारी राशि के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं,कई स्थानों पर जिम के उपकरण जर्जर हालत में पड़े हैं और उनका समुचित उपयोग नहीं हो रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि इन उपकरणों की खरीद और स्थापना सरकारी योजना के तहत की गई है, तो संबंधित स्थल पर योजना का नाम, स्वीकृत राशि, कार्यान्वयन एजेंसी और खर्च का विवरण दर्शाने वाला बोर्ड होना चाहिए। लेकिन मौके पर ऐसे किसी स्पष्ट सूचना-पट्ट का पता नहीं चल रहा है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इन उपकरणों की खरीद किस योजना के तहत की गई और इसके लिए सरकारी खजाने से कितनी राशि खर्च हुई?
बगहा-2 प्रखंड में कुल 25 पंचायतें हैं। ऐसे में ग्रामीणों का सवाल है कि कितनी पंचायतों में जिम उपकरण लगाए गये, प्रत्येक पंचायत में कितनी राशि खर्च हुई और पूरे प्रखंड में इस मद में कुल कितना भुगतान किया गया। उपकरणों की खरीद किस वित्तीय वर्ष में हुई और किस एजेंसी या आपूर्तिकर्ता से सामग्री खरीदी गई, इसकी जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
ग्रामीणों के मुताबिक, यदि योजना का उद्देश्य गांव के लोगों को स्वस्थ रखने के लिए सार्वजनिक व्यायाम की सुविधा उपलब्ध कराना था, तो उपकरणों का उपयोग सुनिश्चित करना भी संबंधित विभाग और पंचायत की जिम्मेदारी है। लेकिन कई जगहों पर उपकरणों की स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है।
सबसे बड़ा सवाल जिम उपकरणों की गुणवत्ता और उनकी उपयोगिता को लेकर है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उपकरण खरीद के कुछ समय बाद ही जर्जर अथवा अनुपयोगी हो गए, तो उनकी गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर की गई थी? क्या खरीद से पहले उपकरणों के मानक तय किए गए थे? क्या आपूर्ति के समय अधिकारियों या संबंधित तकनीकी कर्मियों ने सामग्री का भौतिक सत्यापन किया था? यदि सत्यापन हुआ था तो उसकी रिपोर्ट कहां है?
यह भी जांच का विषय है कि जिन उपकरणों की खरीद की गई, वे निर्धारित दर और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप थे या नहीं।
मामले को लेकर विधायक प्रतिनिधि शत्रुघ्न पटेल ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत संबंधित विभाग से योजना और खर्च का विस्तृत ब्योरा मांगा है। बताया जा रहा है कि आरटीआई के माध्यम से योजना की स्वीकृति, राशि, खरीद, भुगतान और कार्यान्वयन से जुड़ी जानकारी मांगी गई है।
लेकिन आरोप है कि विभाग आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी का जवाब नहीं दे रहा है,यदि ऐसा है तो यह स्थिति अपने आप में गंभीर सवाल खड़े करती है। सरकारी योजना से संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं होने से ग्रामीणों के बीच संदेह और बढ़ रहा है।
सरकारी योजनाओं का उद्देश्य केवल राशि खर्च करना नहीं, बल्कि उसका वास्तविक लाभ आम जनता तक पहुंचाना है। यदि ग्रामीणों के स्वास्थ्य के लिए जिम उपकरण लगाए गए थे, तो यह सुनिश्चित होना चाहिए कि वे सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और उपयोग के योग्य हों।
मौके पर जर्जर और अनुपयोगी पड़े उपकरणों की तस्वीर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या केवल उपकरण खरीदकर उन्हें किसी स्थान पर रख देना ही विकास कार्य माना जायेगा,यदि उपकरण उपयोग में नहीं आ रहे हैं या समय से पहले खराब हो गए हैं, तो इसके लिए जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए ग्रामीणों की मांग है कि बगहा-2 प्रखंड की सभी 25 पंचायतों में लगाए गए जिम उपकरणों का भौतिक सत्यापन कराया जाय। प्रत्येक पंचायत में योजना की स्वीकृति, प्राक्कलन, भुगतान, खरीद एजेंसी, आपूर्ति बिल, गुणवत्ता जांच और उपयोगिता की जांच होनी चाहिए।
साथ ही यह भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए कि किस पंचायत में कितनी राशि खर्च हुई, किसे भुगतान किया गया और वर्तमान में खरीदे गए उपकरणों की स्थिति क्या है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द नाथ तिवारी

