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ज्ञान भारतम मिशन: कटिहार में 1622 पुरानी पांडुलिपियां हुई डिजिटल

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ज्ञान भारतम मिशन: कटिहार में 1622 पुरानी पांडुलिपियां हुई डिजिटल


कटिहार, 28 अप्रैल (हि.स.)। आपके घर में दादा-परदादा के जमाने की कोई हस्तलिखित किताब, ताम्रपत्र या पुराना दस्तावेज रखा है? तो उसे संभाल कर रखिए और जिला प्रशासन को खबर करिए। कटिहार में ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत 75 साल से पुरानी धरोहरों को डिजिटल कर सुरक्षित किया जा रहा है।

मंगलवार को एनआईसी सभागार में डीएम आशुतोष द्विवेदी ने बताया कि 15 मार्च से शुरू हुआ यह अभियान 15 जून तक चलेगा। अब तक शहर से लेकर गांव तक से 1622 से ज्यादा दुर्लभ पांडुलिपियों को स्कैन कर डिजिटल रूप में सहेजा जा चुका है।

“मूल कॉपी आप ही के पास रहेगी”

डीएम ने कहा कि अगर आपके पास 75 साल पुराना कोई हस्तलिखित दस्तावेज, ताम्रपत्र या धातु पर लिखा अभिलेख है तो हमें बताएं। हमारी टीम खुद आपके घर जाकर उसकी डिजिटल कॉपी बनाएगी। मूल दस्तावेज आप ही के पास रहेगा। हम सिर्फ कॉपी करके भारत सरकार के पोर्टल पर अपलोड करेंगे ताकि वह हमेशा के लिए सुरक्षित हो जाए।

उन्होंने कहा कि कटिहार में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहरों की कमी नहीं है। लोगों से बात कर इनकी खोज की जा रही है। यह अभियान आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास को बचाने का बड़ा कदम है।

तीन लोगों को किया सम्मानित

इस मौके पर डीएम ने पांडुलिपि देने वाले तीन लोगों को शॉल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। सम्मान पाने वालों में गुरुद्वारा लक्ष्मीपुर के अध्यक्ष गुरविंदर सिंह, गुणानंद झा और अमदाबाद के दर्पण मंडल शामिल हैं।

कार्यक्रम में अपर समाहर्ता बिनोद कुमार, उप विकास आयुक्त अमित कुमार, जिला कला संस्कृति पदाधिकारी रीना गुप्ता, डीपीआरओ अभिषेक रंजन और जिला गोपनीय शाखा के प्रभारी अभिषेक किशोर मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / विनोद सिंह