सरकार धरनारत पीएचडी अभ्यर्थियों की मांगों पर करें पहल: राजेश राम
पटना, 09 अगस्त (हि.स.)। स्टैच्यूट्स फॉर अपॉइंटमेंट्स ऑफ असिस्टेंट प्रोफेसर्स 2026 से उच्च शिक्षा में अराजकता बढ़ेगी। साथ ही विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के स्वायत्ता को खत्म करने की ओर एनडीए सरकार की पहल बेहद तानाशाहीपूर्ण है। ये बातें बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष राजेश राम ने गर्दनीबाग धरनास्थल पर छः दिनों से आमरण अनशन कर रहे पीएचडी धारकों के समर्थन में पहुंचकर कही।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने धरनारत पीएचडी अभ्यर्थियों के समर्थन में कहा कि उनकी छ: मांगे पूरी तरीके से जायज है और सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली 2026 उच्च शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरीके से राज्य में धराशायी कर देगी। इस नियमावली से सहायक प्राध्यापक नियुक्ति में अराजकता बढ़ेगी। साथ ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि छात्रों की मांगों के समर्थन में हम उनके मांग पत्र को देश के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से लेकर राज्य के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री और बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग को प्रेषित कर धरनारत अभ्यर्थियों के समर्थन में इस नियमावली को अविलंब निरस्त करने की मांग करेंगे।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि विगत छ: दिनों से आमरण अनशन पर बैठे कुमुद पटेल, अभिषेक कुमार और विकू सिंह के स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था राज्य सरकार करें। साथ ही उन्होंने मांग रखी कि राज्य सरकार को चाहिए कि अविलंब उच्च अधिकारियों की एक टीम बनाकर उनके मांग को सुना जाएं और उन्हें दुरुस्त करने की ओर कदम उठाया जाएं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि कोटा, देहरादून और प्रयागराज में हमारे नेता और देश के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार छात्रों के हित में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और यहां हमारे राज्य के सर्वाधिक उच्च डिग्री धारी छात्रों की हकमारी कर रही इस एनडीए सरकार के मुख्यमंत्री कार्यालय से दो सौ मीटर की दूरी पर धरना पर बैठे पीएचडी अभ्यर्थियों की मांग पर अब तक मौन रहना उनकी गैर-जिम्मेदारी दिखाती है।
इस दौरान प्रवक्ता डॉ स्नेहाशीष वर्धन, पंकज यादव, प्रेमचंद सिंह, चंद्र प्रकाश सिंह सहित सैंकड़ों कांग्रेसजनों ने धरनास्थल पर पहुंचकर आंदोलनकारी छात्रों का समर्थन किया।
हिन्दुस्थान समाचार / सुरभित दत्त

