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तुलसीदास जी की वाणी में राम केवल आराध्य नहीं, आदर्श जीवन-मूल्यों के प्रतीक : संजय सरावगी

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तुलसीदास जी की वाणी में राम केवल आराध्य नहीं, आदर्श जीवन-मूल्यों के प्रतीक : संजय सरावगी


तुलसीदास जी की वाणी में राम केवल आराध्य नहीं, आदर्श जीवन-मूल्यों के प्रतीक : संजय सरावगी


पटना, 26 अगस्त (हि.स.)। गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती सप्ताह के अवसर पर सनातन संस्कृति चेतना परिषद के तत्वावधान में आज रविंद्र भवन, पटना में ‘तुलसी के राम’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

शिक्षा मंत्री मिथिलेश कुमार तिवारी की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी भी शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एवं प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपनी रचनाओं के माध्यम से भगवान श्रीराम के चरित्र को जन-जन तक पहुंचाने का महान कार्य किया। तुलसीदास जी की वाणी में राम केवल आराध्य नहीं, बल्कि समाज के लिए आदर्श जीवन-मूल्यों के प्रतीक हैं। मर्यादा, त्याग, करुणा, सत्य, सेवा और कर्तव्यबोध जैसे गुण भगवान श्रीराम के चरित्र से हमें निरंतर प्रेरणा देते हैं।

उन्होंने कहा कि ‘तुलसी के राम’ का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना सदियों पहले था। बदलते समय में जब समाज के सामने अनेक चुनौतियां हैं, तब श्रीराम के आदर्श हमें संयम, सद्भाव और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की ऐसी समृद्ध परंपरा है, जो मानवता, संस्कार और सामाजिक समरसता का संदेश देती है।

प्रदेश अध्यक्ष सरावगी ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस के माध्यम से भारतीय समाज को संस्कार और संस्कृति से जोड़ने का काम किया। आज आवश्यकता है कि हम नई पीढ़ी को भगवान श्रीराम के आदर्शों, तुलसीदास जी के साहित्य और भारतीय संस्कृति की महान परंपरा से परिचित कराएं। राम के आदर्श परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा देते हैं।

उन्होंने कहा कि श्रीराम का जीवन हमें यह सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म के मार्ग से विचलित नहीं होना चाहिए। उनके आदर्शों को आत्मसात कर समाज में प्रेम, भाईचारा, सेवा और सद्भाव की भावना को मजबूत किया जा सकता है। यही तुलसीदास जी के साहित्य और ‘तुलसी के राम’ की सार्थकता है।

संजय सरावगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी सांस्कृतिक विरासत और गौरव को पुनर्स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बिहार की धरती सदियों से ज्ञान, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना की भूमि रही है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से हमारी युवा पीढ़ी अपनी जड़ों और गौरवशाली परंपराओं से और मजबूती से जुड़ती है।

कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री भीखू भाई दलसानिया, विधायकगण, सनातन संस्कृति चेतना परिषद के अध्यक्ष मनीष शुक्ला सहित बड़ी संख्या में रामभक्त एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / सुरभित दत्त