गोल्डन मिनट बचा सकता है नवजात की जिंदगी
सीवान, 10 मई (हि.स.)। नवजात शिशुओं की मृत्यु दर में कमी लाने को लेकर प्रशिक्षण पहल के तहत विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में शिशु रोग विशेषज्ञ, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों, जीएनएम तथा स्टाफ नर्सों को नवजात पुनर्जीवन तकनीकों का विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यक्रम के नोडल ऑफिसर एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. समीर कुमार ने बताया कि बिहार में वर्तमान नवजात मृत्यु दर प्रति हजार जीवित जन्म पर 18 है, जबकि राष्ट्रीय औसत 19 है।
सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक नवजात मृत्यु दर को और कम करना है। उन्होंने कहा कि नवजात शिशुओं की मौत का एक प्रमुख कारण जन्म के समय श्वसन अवरोध यानी बर्थ एस्फिक्सिया है। ऐसे मामलों में समय पर “नियोनेटल रिससिटेशन” यानी नवजात पुनर्जीवन तकनीक अपनाकर शिशुओं की जान बचाई जा सकती है।
उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम द्वारा राज्यभर के सदर अस्पताल, लेबर रूम एवं एसएनसीयू में कार्यरत चिकित्सकों और स्टाफ नर्सों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण एनएसएसके मॉड्यूल पर आधारित था, जिसमें नवजात को तत्काल सांस दिलाने, आपातकालीन देखभाल तथा पुनर्जीवन तकनीकों की जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण के दौरान नवजात शिशु के जन्म के बाद शुरुआती “गोल्डन मिनट” की महत्ता पर विशेष जोर दिया गया। डॉ. समीर कुमार ने कहा कि जन्म के तुरंत बाद सही प्राथमिक उपचार और सांस दिलाने की प्रक्रिया अपनाकर कई नवजातों की जान बचाई जा सकती है। प्रशिक्षण में स्वास्थ्यकर्मियों को आधुनिक तकनीकों एवं नवजात पुनर्जीवन की प्रक्रियाओं की व्यावहारिक जानकारी भी दी गई।
कार्यक्रम में उपस्थित चिकित्सकों एवं जीएनएम कर्मियों को शिशु की सांस रुकने, ऑक्सीजन की कमी तथा अन्य आपात परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई करने के तरीके सिखाए गए। साथ ही विभिन्न उपकरणों के सही उपयोग और आपातकालीन प्रबंधन पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. श्रीनिवास प्रसाद ने कहा कि नवजात शिशुओं की सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम स्वास्थ्यकर्मियों की दक्षता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे नवजात शिशुओं को समय पर बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में मदद मिलेगी।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / Amar Nath Sharma

