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भागलपुर स्टेशन परिसर में मनी गांधी जयंती: 'पीस सेंटर' और 'परिधि' ने मनाया अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस

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भागलपुर स्टेशन परिसर में मनी गांधी जयंती: 'पीस सेंटर' और 'परिधि' ने मनाया अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस


भागलपुर, 02 अक्टूबर (हि.स.)। गांधी जयंती और अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के अवसर पर शुक्रवार को भागलपुर रेलवे स्टेशन परिसर में एक अनोखा और खुला आयोजन किया गया। 'पीस सेंटर' और 'परिधि' संस्था द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गांधी जी के विचारों को आम लोगों तक पहुंचाना था। 'गांधी सड़क के थे, आम के थे' की भावना के साथ संस्थाएं पिछले कई वर्षों से इसी तरह नुक्कड़ों और चौराहों पर इस दिवस को मनाती आ रही हैं।

इस खुले आयोजन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोग—जैसे रिक्शा चालक, ठेला चालक, टोटो चालक, भिखारी, मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति और स्टेशन पर रात गुजारने वाले खानाबदोश—सहज रूप से इसके मुख्य भागीदार बने। कार्यक्रम के दौरान प्रेरणादायक गीतों की प्रस्तुति और विचार-विमर्श (वक्तव्य) का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का संचालन करते हुए पीस सेंटर के समन्वयक राहुल ने कहा, गांधी जी की अहिंसक क्रांति ने पूरी दुनिया को गहराई से प्रभावित किया है। चाहे अमेरिका का रंगभेद विरोधी आंदोलन हो, म्यांमार का मुक्ति आंदोलन या दक्षिण अफ्रीका का संघर्ष—ये सभी गांधीवादी विचारधारा की ही देन हैं। गांधी जी ने ही दुनिया को अहिंसक प्रतिरोध का सबसे सशक्त रास्ता दिखाया। 'परिधि' के निदेशक उदय ने अपने संबोधन में कहा, गांधी जी ने अहिंसा को केवल एक विचार नहीं, बल्कि राजनीति, संघर्ष और जन-आंदोलनों का मुख्य औजार बनाया। आज जब हम धरती का बढ़ता तापमान, जलवायु संकट और पारिस्थितिकी असंतुलन देखते हैं, तो गांधी जी की बातें और प्रासंगिक हो जाती हैं। वर्तमान समय का यह संकट आधुनिक विकास का 'बायप्रोडक्ट' है, जिसे गांधी जी ने बहुत पहले ही 'शैतानी सभ्यता' की संज्ञा दी थी। वरिष्ठ शिक्षाविद प्रो. डॉ. सुधांशु शेखर ने कहा कि गांधी जी का व्यक्तित्व ऐसा था कि आज जो लोग उनके राजनीतिक विरोधी हैं, वे भी उनके गुणों और सिद्धांतों की सराहना करने से खुद को रोक नहीं पाते। वहीं मो. रिजवान ने अपने विचार रखते हुए कहा कि गांधी केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में सकारात्मक बदलाव का मार्ग प्रशस्त करते हैं। मो. बाकिर ने इस बात पर जोर दिया कि बंद कमरों के बजाय सड़क पर गांधी जयंती मनाना बेहद रोचक और आम जनता तक गांधी के विचारों को पहुंचाने के लिए बेहद जरूरी कदम है। कार्यक्रम में विनय भारती ने अपनी सुरीली आवाज में गांव छोड़ब नाहीं, रघुपति राघव राजा राम और वैष्णव जन तो तेने कहिए जैसे गीतों को गाकर पूरे माहौल को गांधीमय और भावुक कर दिया। इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में ललन, सुषमा, जानवी, अशफ़ाक़, स्मिता, भरत, मनोज, अभिजीत, नीरज, अभिषेक, मनोज कुमार सहित कई अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका और महती योगदान दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर