वाल्मीकिनगर में वन भूमि विवाद गहराया: ग्रामीणों ने सौंपा ज्ञापन
पश्चिम चम्पारण (बगहा),11 जुलाई (हि.स.)।
वाल्मीकिनगर क्षेत्र में वन विभाग द्वारा कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद वन भूमि विवाद और गहरा गया है।
कार्रवाई के दौरान जेसीबी मशीन जलाने तथा हिंसात्मक प्रदर्शन के मामले में वन विभाग ने वाल्मीकिनगर थाना में सात नामजद एवं करीब 150 अज्ञात लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई है। इस कार्रवाई के विरोध में सिकटा के पूर्व माले विधायक बिरेंद्र प्रसाद के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने बगहा अनुमंडल प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर न्याय की मांग शनिवार को की है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस भूमि को वन विभाग अपनी जमीन बता रहा है, उस पर उनके परिवार वर्षों से खेती करते आ रहे हैं। उनका दावा है कि यह उनकी पुश्तैनी जमीन है, जिस पर वर्तमान समय में धान,गन्ना सहित अन्य फसलें लहलहा रही हैं। ग्रामीणों ने कहा कि सरकार और वन विभाग उन्हें उजाड़ने के बजाय जमीन का बंदोबस्त करें, ताकि उनके जीवन-यापन का संकट समाप्त हो सके।
ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि एक सप्ताह के भीतर उनकी समस्या का समाधान किया जाय। उनका कहना है कि यदि निर्धारित अवधि में न्याय नहीं मिला तो वे लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
सिकटा विधायक बिरेंद्र प्रसाद ने ग्रामीणों की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि वर्षों से खेती कर रहे लोगों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के हटाना उचित नहीं है। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा ग्रामीणों के हितों की रक्षा करते हुए स्थायी समाधान निकालने की मांग की।
दूसरी ओर, वन विभाग का कहना है कि वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना की संरक्षित वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान कुछ लोगों ने विरोध करते हुए हिंसक प्रदर्शन किया और जेसीबी मशीन को आग के हवाले कर दिया। इस मामले में सात लोगों को नामजद करते हुए लगभग 150 अज्ञात लोगों के विरुद्ध वाल्मीकिनगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। विभाग का कहना है कि कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जायेगी।
फिलहाल क्षेत्र में स्थिति को देखते हुए प्रशासन सतर्क है। भूमि को लेकर वन विभाग और ग्रामीणों के बीच जारी विवाद ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई और ग्रामीणों की मांगों पर होने वाले निर्णय पर टिकी हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द नाथ तिवारी

