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कुशेश्वरस्थान पूर्वी में बाढ़ का कहर गहराया, कई गांव टापू बने

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कुशेश्वरस्थान पूर्वी में बाढ़ का कहर गहराया, कई गांव टापू बने


सरकारी नाव व राहत के अभाव में बढ़ी मुश्किलें

दरभंगा, 16 जुलाई (हि.स.)। नेपाल के तराई क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश और कोसी बैराज से छोड़े गए पानी के कारण दरभंगा के कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। कोसी और कमला बलान नदियों के बढ़ते जलस्तर ने कई गांवों को चारों ओर से घेर लिया है, जिससे हजारों लोगों का जनजीवन प्रभावित हो गया है। प्रभावित गांवों का सड़क संपर्क टूटने से ग्रामीणों को आवागमन के लिए निजी नावों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

सबसे अधिक प्रभावित इटहर पंचायत के इटहर, चौकिया, लक्ष्मिनियाँ, बलथरवा, बसबरिया तथा सूघराईन पंचायत के भरैन टोला सहित कई गांव पूरी तरह टापू में तब्दील हो चुके हैं। बाजार, अस्पताल, बैंक और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए लोगों को नाव से आना-जाना पड़ रहा है। निजी नाव संचालक प्रति व्यक्ति आने-जाने के लिए 40 रुपये तक किराया ले रहे हैं, जिससे गरीब परिवारों की परेशानी और बढ़ गई है।

ग्रामीण रविन्द्र राय, राम जप्पो राय, राजेश राय, जय कुमार पोद्दार, रेणु देवी, रुणा देवी, टुनो सदा और भोला सदा सहित कई लोगों ने बताया कि अब तक प्रशासन की ओर से सरकारी नाव की व्यवस्था नहीं की गई है। उनका कहना है कि सरकारी नावों का नियमित संचालन और उनकी स्पष्ट पहचान होने से लोगों को राहत मिल सकती है।

बाढ़ का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी साफ दिखाई दे रहा है। प्राथमिक विद्यालय लक्ष्मिनियाँ और प्राथमिक विद्यालय इटहर पोखर चारों ओर से पानी से घिर जाने के कारण पठन-पाठन ठप हो गया है। वहीं मध्य विद्यालय बर्निया के शिक्षक नाव के सहारे विद्यालय पहुंच रहे हैं। जलस्तर में लगातार वृद्धि होने पर अन्य विद्यालयों के भी प्रभावित होने की आशंका है।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में खाद्य सामग्री, स्वच्छ पेयजल और दवाओं की समस्या गहराने लगी है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई परिवार पहले से उपलब्ध राशन के सहारे गुजर-बसर कर रहे हैं, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

बाढ़ का पानी उसरी, उजुआ सिमरटोका और तिलकेश्वर पंचायत के निचले इलाकों में भी तेजी से फैल रहा है। इससे लोगों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल सरकारी नाव, राहत सामग्री, स्वच्छ पेयजल, पशु चारा और चिकित्सा शिविर की व्यवस्था करने की मांग की है।

ग्रामीणों का आरोप है कि आपदा की इस स्थिति में अब तक न तो बाढ़ नियंत्रण व्यवस्था प्रभावी दिख रही है और न ही सरकारी नावों की उपलब्धता की स्पष्ट जानकारी लोगों तक पहुंचाई गई है। इस संबंध में अंचलाधिकारी राकेश रोशन भारती से उनके सरकारी मोबाइल नंबर पर संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कहीं सरकारी नाव संचालित भी की जा रही है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि बाढ़ प्रभावित लोगों को समय पर राहत मिल सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / Krishna Mohan Mishra