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राघोपुर में बाढ़ ने बढ़ाई मुश्किलें, हाई अलर्ट पर प्रशासन

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राघोपुर में बाढ़ ने बढ़ाई मुश्किलें, हाई अलर्ट पर प्रशासन


भागलपुर, 02 सितंबर (हि.स.)। जिले के खरीक और नवगछिया अनुमंडल अंतर्गत आने वाले राघोपुर इलाके में गंगा नदी ने इस वर्ष अपना सबसे भयानक रूप दिखाया है। राघोपुर-काजीकौरेया (नरकटिया) जमींदारी तटबंध का करीब 150-200 मीटर का बड़ा हिस्सा गंगा की तेज धारा और भीषण कटाव के चलते ढह गया है। तटबंध टूटने के साथ ही गंगा का पानी अत्यधिक वेग से राघोपुर गांव के विभिन्न वार्डों और आस-पास की घनी आबादी में प्रवेश कर गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पूरे प्रशासनिक अमले को हाई अलर्ट पर रखा गया है। तटबंध टूटने के बाद कटाव की विभीषिका इतनी तीव्र थी कि राघोपुर का ऐतिहासिक और करीब सौ वर्ष पुराना 'चैती दुर्गा मंदिर' देखते ही देखते ताश के पत्तों की तरह ढहकर गंगा नदी में समाहित हो गया। अब पुरानी रेलवे लाइन और बची हुई आवासीय बस्तियों पर भी कटाव का सीधा खतरा मंडराने लगा है। बाढ़ के पानी ने राघोपुर और आस-पास के गांवों में भयंकर तबाही मचाई है। राघोपुर गांव के कई वार्ड पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। लोगों के घरों में तीन से चार फीट तक पानी भर गया है। सैकड़ों परिवार अपना लाखों का आशियाना और जमा-पूंजी छोड़कर ऊंचे स्थानों, राष्ट्रीय राजमार्ग और जिला प्रशासन द्वारा बनाए गए राहत शिविरों की ओर पलायन करने को मजबूर हुए हैं। सैकड़ों एकड़ में लगी खड़ी फसलें नष्ट हो चुकी हैं। पशुओं के लिए चारे का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। चारे की तलाश के दौरान ही हाल ही में एक व्यक्ति के डूबने की दुखद खबर भी सामने आई है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन विभाग और एसडीआरएफ की टीमें मुस्तैदी से लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटी हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों फ्लड फाइटिंग और तटबंध मरम्मत कार्य में लगे 21-22 मजदूरों को ले जा रही एक नाव गंगा की तेज लहरों में पलट गई थी। एसडीआरएफ की टीम ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर 19 मजदूरों को सकुशल पानी से बाहर निकाल लिया था, जबकि लापता लोगों की तलाश के लिए सघन खोजी अभियान चलाया गया। वहीं भागलपुर की जिलाधिकारी अलंकृता पांडे खुद पूरी स्थिति की निगरानी कर रही हैं। नाव हादसे के बाद जिला प्रशासन ने बाढ़ नियंत्रण कार्य के लिए निर्माण सामग्री को नावों से ले जाने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। अब ट्रैक्टरों के माध्यम से तटबंधों तक सामग्री पहुंचाई जा रही है। विस्थापित लोगों के लिए शरण स्थली बनाई गई है। प्रभावित ग्रामीणों के लिए कम्युनिटी किचन, शुद्ध पेयजल और आपातकालीन चिकित्सा शिविरों की व्यवस्था की गई है। जिला प्रशासन ने लोगों से पैनिक न होने और किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है। बिहार के उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने स्थिति को बेहद चुनौतीपूर्ण बताया है। विभाग के मुख्य अभियंता और दर्जनों तकनीकी अधिकारी और ठेकेदार घटना स्थल पर कैंप कर रहे हैं। गंगा की बदलती धारा और 90 डिग्री के मोड़ के कारण आ रहे भारी दबाव को रोकने के लिए 'फ्लड फाइटिंग' तकनीक के तहत युद्धस्तर पर बोल्डर क्रेटिंग, जियो बैग और सैंडबैग डाले जा रहे हैं। हालांकि, गंगा का तेज बहाव मरम्मत कार्य में लगातार बाधा डाल रहा है। स्थानीय ग्रामीणों में प्रशासन और विभाग के प्रति गहरा असंतोष और निराशा देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कितटबंध के समय रहते सुदृढ़ीकरण न होने के कारण यह नौबत आई है। आज हमारा सालों पुराना दुर्गा मंदिर और हमारी पुरखों की जमीन नदी में समा गई। विस्थापित हुए परिवारों का कहना है कि उन्हें मिलने वाली सरकारी सहायता और पॉलिथीन शीट्स की रफ्तार काफी धीमी है। पशुओं को बचाने के लिए वे जान जोखिम में डालकर बाढ़ के पानी के बीच से चारा लाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि कटाव को रोकने के लिए कागजी दावों के बजाय जमीन पर और ठोस व स्थाई काम किया जाए। बिहार के इस हिस्से में गंगा का जलस्तर फिलहाल थोड़ा स्थिर जरूर हुआ है, लेकिन तेज करंट और भारी कटाव के कारण राघोपुर पर खतरा अभी टला नहीं है।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर