डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर सुपौल में चिकित्सकों का सांकेतिक ओपीडी बहिष्कार
सुपौल, 22 जुलाई (हि.स.)। राजस्थान के अलवर जिले के सदर अस्पताल में एक प्रसूता की माैत के बाद हुए हंगामे के दौरान सिविल सर्जन पर हुए हमले तथा दोषियों के विरुद्ध अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के विरोध में बुधवार को पूरे बिहार के सरकारी चिकित्सकों ने एक दिवसीय सांकेतिक ओपीडी बहिष्कार कर अपना विरोध दर्ज कराया। इसी कड़ी में सदर अस्पताल के चिकित्सकों ने भी एकजुट होकर सांकेतिक हड़ताल में भाग लिया और चिकित्सकों की सुरक्षा एवं सम्मान की मांग बुलंद की।
इस दौरान अस्पताल परिसर में चिकित्सकों ने कहा कि स्वास्थ्यकर्मी दिन-रात मरीजों की सेवा में समर्पित रहते हैं, लेकिन कई बार उन्हें हिंसा, अभद्र व्यवहार और हमलों का सामना करना पड़ता है। अलवर की घटना ने पूरे देश के चिकित्सक समुदाय को झकझोर दिया है। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त और त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। हालांकि चिकित्सकों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन पूरी तरह सांकेतिक और शांतिपूर्ण है। जनहित को सर्वोपरि रखते हुए आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित नहीं होने दिया गया।
सदर अस्पताल में इमरजेंसी सेवा, लेबर वार्ड, एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) सहित अन्य आवश्यक चिकित्सा सेवाएं पूरे दिन नियमित रूप से संचालित होती रहीं। गंभीर मरीजों के इलाज में किसी प्रकार की बाधा नहीं आई और चिकित्सकों ने आपातकालीन ड्यूटी का पूरी जिम्मेदारी के साथ निर्वहन किया।
चिकित्सकों ने मांग की कि अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाए, हिंसा करने वालों के खिलाफ कड़े कानून के तहत कार्रवाई हो तथा चिकित्सकों की गरिमा और सम्मान की रक्षा सुनिश्चित की जाए। सदर अस्पताल के चिकित्सकों ने एक स्वर में कहा कि डॉक्टरों की सुरक्षा केवल डॉक्टरों का नहीं बल्कि पूरे समाज का मुद्दा है। सुरक्षित वातावरण मिलने पर ही चिकित्सक पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ मरीजों की बेहतर सेवा कर सकेंगे। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि
हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र

