श्रीराम कथा के विश्राम सत्र में उमड़ी आस्था, हजारों श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया
सीवान, 16 मार्च (हि.स.)।
सीवान नगर के वीएमएचई इंटर कॉलेज मैदान में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा ने आस्था और भक्ति का अनूठा इतिहास रच दिया।
सकारात्मकता, समरसता और संचेतना के प्रसार के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय कथावाचक राजन जी महाराज के श्रीमुख से आयोजित इस कथा के विश्राम सत्र के दिन माहौल भावुक हो उठा। जहां राजन जी महाराज आयोजन समिति के सदस्यों के समर्पण से अभिभूत दिखे, वहीं आयोजक भी आभार प्रकट करते समय भावुक नजर आए। विश्राम सत्र के दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
कथा समापन के अवसर पर आयोजित महाभंडारे में हजारों लोगों ने महाप्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। कथा के दौरान राजन जी महाराज ने सुंदरकांड से लेकर लंकाकांड तक के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि मनुष्य धर्म और सत्य के मार्ग पर चलता है तो ईश्वर स्वयं उसकी सहायता करते हैं। उन्होंने कहा कि हमें अपने कर्म पर ध्यान देना चाहिए, फल देना ईश्वर का कार्य है और ईश्वर द्वारा किया गया हर कार्य दिव्य और अद्भुत होता है।
राजन जी महाराज ने भरत मिलाप और शबरी प्रसंग का मार्मिक वर्णन कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि चित्रकूट में हुआ भरत मिलाप प्रेम, त्याग, सत्य और न्याय की सर्वोच्च मिसाल है। आज के समय में भाई अक्सर संपत्ति के बंटवारे को लेकर विवाद करते हैं, लेकिन यदि भाई संपत्ति के बजाय विपत्ति का बंटवारा करें तो परिवार में प्रेम और विश्वास की धारा प्रवाहित हो सकती है।
शबरी प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने भजन “जब एही रहिया प्रभु जी के आवन होई” प्रस्तुत किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। उन्होंने कहा कि शबरी की नवधा भक्ति भगवान श्रीराम के प्रति उनकी अटूट आस्था और समर्पण का प्रतीक है। कथा के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। श्रद्धालुओं के बीच पंच पल्लव के पौधे वितरित किए गए। रेनुआ स्थित मंदिर और भरौली मठ में राजन जी महाराज द्वारा पौधरोपण कर संरक्षण का संकल्प दिलाया गया।
इस अवसर पर डॉ. सौरभ सिंह, डॉ. अजय सिंह, डॉ. अशोक कुमार वर्मा, बीडीओ नीतू प्रियदर्शिनी, डीपीओ दिलीप कुमार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. राजन कल्याण सिंह, स्वागताध्यक्ष डॉ. शरद चौधरी, संयोजक डॉ. रूपेश कुमार, संरक्षक डॉ. रामेश्वर कुमार और डॉ. राम इकबाल गुप्ता ने किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / Amar Nath Sharma

