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मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन में आई दरार, चार हजार करोड़ की राशि से हो रहा निर्माण

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मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन में आई दरार, चार हजार करोड़ की राशि से हो रहा निर्माण


भागलपुर, 14 जुलाई (हि.स.)। लगभग चार हजार करोड़ रुपये की लागत से बन रही मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन परियोजना उद्घाटन से पहले ही सवालों के घेरे में आ गई है। जिले के गनगनिया के पास निर्माणाधीन फोरलेन की डाउन लाइन में करीब 40 मीटर लंबी और लगभग दो इंच चौड़ी दरार मिलने से यह मामला फिर चर्चा में है।

जुलाई 2024 में पहली बारिश के दौरान सड़क के ढलाई वाले हिस्से में धसान (धंसाव) ने निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए थे। अब ठीक दो वर्ष बाद, जुलाई 2026 में भागलपुर जिले के गनगनिया के पास निर्माणाधीन फोरलेन की डाउन लाइन में करीब 40 मीटर लंबी और लगभग दो इंच चौड़ी दरार हो गई है।

दिलचस्प यह है कि दो साल पहले धसान की वजह अधिकारियों और निर्माण एजेंसी की ओर से 'चूहों द्वारा मिट्टी खोदने' को बताया गया था। लेकिन अब उसी परियोजना में दरार सामने आने के बाद निर्माण की गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और तकनीकी मानकों पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

जुलाई 2024 में कहलगांव के दियोरी बंशीपुर-चांय टोला के समीप कोवा नदी के पास ढलाई वाले हिस्से में तीन स्थानों पर धसान हुआ था। सूचना मिलते ही अधिकारियों ने दोनों ओर बैरिकेडिंग कर 'वर्क इन प्रोग्रेस' का बोर्ड लगाया और आनन-फानन में मरम्मत शुरू करा दी। उस समय मौके पर मौजूद इंजीनियरों ने दावा किया था कि फ्लाई ऐश (राख) वाले हिस्से की मिट्टी को चूहों ने खोद दिया, जिससे धसान हुआ। हालांकि निरीक्षण करने पहुंचे वरिष्ठ अधिकारियों ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और साफ कहा था कि मुख्य सड़क के दोनों किनारों पर चार-चार मीटर ऊंची मिट्टी की दीवार होने के बावजूद चूहों से इतना बड़ा नुकसान संभव नहीं दिखता।

अधिकारियों ने प्राथमिक तौर पर मिट्टी की भराई में लापरवाही और फ्लाई ऐश के कटाव को संभावित कारण माना था।

इसी परियोजना में अब गनगनिया के समीप डाउन लाइन में लगभग 40 मीटर लंबे हिस्से में दरार मिलने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने जांच टीम गठित कर दी है।

परियोजना निदेशक मनीष कुमार के अनुसार, सड़क का निर्माण कार्य अभी जारी है और प्रारंभिक जानकारी में सबग्रेड वर्क में दरार दिखाई दी है। उन्होंने कहा कि बिटुमिन सेटलमेंट के दौरान भी ऐसी स्थिति बन सकती है। यदि जांच में गंभीर तकनीकी खामी सामने आती है तो संबंधित हिस्से की केवल मरम्मत नहीं होगी, बल्कि उसे तोड़कर दोबारा बनाया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शुरुआती निर्माण चरण में धसान जैसी घटनाओं की गहन तकनीकी समीक्षा कर स्थायी समाधान किया जाता, तो बाद में ऐसी स्थिति से बचा जा सकता था।

यह सड़क मुंगेर, भागलपुर और साहिबगंज क्षेत्र की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के साथ-साथ व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को गति देने वाली महत्वपूर्ण परियोजना मानी जा रही है। लेकिन उद्घाटन से पहले सामने आए धसान और दरार के मामलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि इतनी बड़ी सार्वजनिक परियोजना में गुणवत्ता नियंत्रण की व्यवस्था कितनी प्रभावी रही।

हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर