पर्युषण महापर्व का समापन, तेरापंथ समाज ने मैत्री और सद्भाव के साथ मनाया क्षमायाचना दिवस
भागलपुर, 16 सितंबर (हि.स.) पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के समापन पर बुधवार को तेरापंथ उपासना कक्ष में क्षमायाचना दिवस श्रद्धा, हर्षोल्लास और मैत्रीभाव के साथ मनाया गया। इस दौरान समाज के श्रावक-श्राविकाओं ने मन, वचन और कर्म से हुई जाने-अनजाने भूलों के लिए एक-दूसरे से गले मिलकर “मिच्छामी दुक्कडम्” कहा और खमत खामणा किया।
दिल्ली से पधारीं मुख्य उपासिका फूल कोठारी ने कहा कि क्षमायाचना आत्मशुद्धि और विनम्रता का पर्व है। मन में किसी के प्रति द्वेष न रखकर सभी के प्रति मैत्रीभाव रखना ही इसकी सच्ची भावना है। वहीं, उपासिका हंसा संचेती ने कहा कि क्षमा मांगना और करना दोनों ही आत्मबल के प्रतीक हैं, जो संबंधों में प्रेम बनाए रखने की प्रेरणा देते हैं। सभा के अध्यक्ष जयंत सदन एवं विनोद बैद ने संयुक्त रूप से कहा कि पर्युषण की साधना तभी सार्थक है जब क्षमा और मैत्री को जीवन का हिस्सा बनाया जाए। यह दिवस अहंकार छोड़कर आत्ममंथन करने और आपसी संबंधों को मजबूत करने का अवसर देता है।
तेरापंथ महिला मंडल की अध्यक्षा संतोष बैद ने इसे अहंकार छोड़ने और विनम्र बनने का पर्व बताया। सभा के मंत्री अभिषेक कुमार जैन ने कहा कि “मिच्छामि दुक्कडम्” केवल शब्द नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और सद्भाव का महासंकल्प है। कार्यक्रम में मुख्य रूप से मंत्री अभिषेक बोथरा, संपत बैद, टीकमचंद बेताला, मनोज बैद, जीवनमल कोठारी, उज्जैन कुमार मालू, पंकज बैद, लव चंद कोठारी, गौतम कोठारी, विनीत बैद, हंसराज बैद मौजूद थे। महिला एवं कन्या मंडल से प्रिया बोथरा, सरोज बोथरा, मीनू बैद, महक बेताला, मनीषा सेठिया, अनीता बैद, मानक बेताला, भावना बैद सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का समापन मंगलभावना के साथ हुआ।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

