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11 करोड़ का पुल अधूरा, दूल्हे को नाव और कंधों के सहारे पहुंचना पड़ा दुल्हन के घर

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11 करोड़ का पुल अधूरा, दूल्हे को नाव और कंधों के सहारे पहुंचना पड़ा दुल्हन के घर


किशनगंज, 02 जुलाई (हि.स.)। जिले के ठाकुरगंज प्रखंड की दिगली-दल्लेगांव पंचायत में करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे पुल के अधूरे रहने का खामियाजा ग्रामीण आज भी भुगत रहे हैं। हाल ही में एक शादी समारोह के दौरान दूल्हे को अपनी बारात के साथ मेची नदी नाव से पार करनी पड़ी। नदी पार करने के बाद ग्रामीणों ने दूल्हे को कंधों पर उठाकर दूसरी ओर पहुंचाया।

इस घटना ने क्षेत्र में अधूरे पड़े पुल निर्माण और विकास कार्यों की हकीकत को एक बार फिर उजागर कर दिया। जानकारी के अनुसार, बारात जब मेची नदी के किनारे पहुंची तो आगे जाने के लिए कोई सुगम रास्ता नहीं था। ऐसे में पहले दूल्हे को नाव के सहारे नदी का एक हिस्सा पार कराया गया। इसके बाद ग्रामीणों ने उसे कंधों पर बैठाकर दुल्हन के घर तक पहुंचाया। इस दौरान मौजूद लोगों ने पूरी घटना का वीडियो भी बनाया, जो क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

ग्रामीणों ने बताया कि दिगली से दल्लेगांव को जोड़ने वाले पुल का निर्माण कार्य 28 जनवरी 2021 को शुरू हुआ था। निर्माण कार्य जनवरी 2023 तक पूरा होना था, लेकिन निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी पुल पूरी तरह चालू नहीं हो सका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस परियोजना पर करीब 11 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, बावजूद इसके पुल के दोनों ओर का संपर्क मार्ग और अन्य कार्य अधूरे पड़े हैं। दल्लेगांव पंचायत के हजारों ग्रामीणों के लिए यह पुल आवागमन की महत्वपूर्ण कड़ी है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, बच्चों को स्कूल भेजने तथा दैनिक जरूरतों के लिए लोगों को आज भी नदी पार करनी पड़ती है।

बरसात के मौसम में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है।दल्लेगांव पंचायत संघर्ष समिति ने पुल निर्माण कार्य शीघ्र पूरा कराने की मांग दोहराई है।ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में लगातार हो रही देरी और प्रशासनिक उदासीनता के कारण क्षेत्र का विकास प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि जब तक पुल पूरी तरह चालू नहीं होगा, तब तक लोगों की परेशानियां समाप्त नहीं होंगी। दूल्हे के नाव और ग्रामीणों के कंधों के सहारे दुल्हन के घर पहुंचने की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाओं का लाभ आखिर कब मिलेगा।

हिन्दुस्थान समाचार / धर्मेन्द्र सिंह