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सीबीएसई पाठ्यक्रम में मैथिली को मिली मातृभाषा के रूप में मान्यता, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया स्वागत

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सीबीएसई पाठ्यक्रम में मैथिली को मिली मातृभाषा के रूप में मान्यता, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया स्वागत


पटना, 25 मई (हि.स.)। अपनी मिठास और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए पहचान रखने वाली मैथिली भाषा को अब शिक्षा जगत में एक नई पहचान मिली है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने अपने पाठ्यक्रम में मैथिली भाषा को मातृभाषा विषय के रूप में मान्यता दे दी है। इस फैसले के बाद अब पहली कक्षा से माध्यमिक स्तर तक के विद्यार्थी मैथिली भाषा की पढ़ाई कर सकेंगे।

इस निर्णय का बिहार सरकार ने स्वागत किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को इस फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे मिथिला की सांस्कृतिक अस्मिता और भाषाई गौरव के लिए ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि मिथिला की समृद्ध परंपरा और मातृभाषा मैथिली को शिक्षा व्यवस्था में सशक्त स्थान दिलाने की दिशा में यह निर्णय अत्यंत स्वागतयोग्य है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय भाषाओं, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण तथा संवर्धन को लगातार मजबूती मिल रही है। उन्होंने कहा कि सीबीएसई पाठ्यक्रम में मैथिली को शामिल किए जाने से आने वाली पीढ़ियां अपनी मातृभाषा, संस्कृति और जड़ों से और अधिक मजबूती से जुड़ सकेंगी।

दरअसल, दरभंगा लोकसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद गोपाल जी ठाकुर ने 8 फरवरी 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी से मुलाकात कर मैथिली भाषा को सीबीएसई पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग की थी। इसके बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने पहल करते हुए मैथिली को मातृभाषा विषय के रूप में मान्यता प्रदान कर दी।

इस संबंध में केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी ने सांसद गोपाल जी ठाकुर को पत्र लिखकर फैसले की जानकारी दी। पत्र में उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) से इस विषय पर जांच कराई गई थी। एनसीईआरटी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत अनुशंसा की है कि पांचवीं कक्षा तक और यथासंभव आठवीं कक्षा तक विद्यार्थियों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा दी जानी चाहिए।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि मैथिली संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं में से एक है। एनसीईआरटी द्वारा मैथिली सहित 121 भारतीय भाषाओं में प्राइमर विकसित किए गए हैं। इसके अलावा, एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों का अनुवाद भी मैथिली सहित 22 अनुसूचित भाषाओं में किया जा रहा है।

शिक्षा विशेषज्ञों और मैथिली भाषा प्रेमियों ने इस फैसले को भाषा संरक्षण और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।---------

हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी