जानकी नवमी पर पुनौराधाम पहुंचे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, दिसंबर-2028 तक मंदिर निर्माण पूरा करने का निर्देश
सीतामढ़ी, 25 अप्रैल (हि.स.)। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शनिवार को जानकी नवमी के पावन अवसर पर माता सीता की जन्मस्थली पुनौराधाम पहुंचे। यहां उन्होंने मां जानकी के दर्शन-पूजन के बाद घोषणा की कि पुनौराधाम मंदिर निर्माण का कार्य हर हाल में दिसंबर-2028 तक पूरा कर लिया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को एक भव्य मंदिर समर्पित किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि मां सीता के आशीर्वाद से ही वे मुख्यमंत्री बने हैं। उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि जानकी नवमी के अवसर पर यहां आना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने राज्य की सुख-समृद्धि और जनता के कल्याण की कामना करते हुए विधिवत पूजा-अर्चना की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने एक और बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि सीतामढ़ी में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज का नाम “मां सीता मेडिकल कॉलेज” रखा जाएगा। इस घोषणा के बाद कार्यक्रम स्थल तालियों और जयकारों से गूंज उठा। लोगों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे माता सीता के प्रति सम्मान बताया।
दर्शन के उपरांत मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर और उर्विजा कुंड का सूक्ष्म निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्य की समीक्षा करते हुए अधिकारियों और अहलूवालिया कंस्ट्रक्शन के प्रतिनिधियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि तय समयसीमा के भीतर मंदिर निर्माण पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और बिहार की पहचान का केंद्र बनेगा।
अपने संबोधन में सम्राट चौधरी ने बताया कि मुख्यमंत्री बनने के तुरंत बाद उन्होंने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को मंदिर निर्माण की वास्तविक स्थिति जानने के लिए भेजा था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के 10वें दिन ही वे मां जानकी का आशीर्वाद लेने पुनौराधाम पहुंचे थे।
उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा घोषित ‘सीतापुरम’ योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि अपनी पहली ही कैबिनेट बैठक में उन्होंने इस योजना को गति देने और मां जानकी से जुड़े सभी धार्मिक स्थलों के विकास के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए थे।
मुख्य कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री डुमरा प्रखंड के राघोपुर बखरी पहुंचे, जहां उन्होंने सैकड़ों वर्ष पुराने ऐतिहासिक मठ के जीर्णोद्धार की आधारशिला रखी। इस प्राचीन मठ का पुनरुद्धार रामायण रिसर्च काउंसिल के माध्यम से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गौरवशाली अतीत को संरक्षित करना और उसे आधुनिक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करना सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मठ के जीर्णोद्धार से स्थानीय स्तर पर पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मां जानकी से जुड़े सभी पवित्र स्थलों को एक सूत्र में जोड़कर विकसित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, पहुंच मार्गों के विकास और सौंदर्यीकरण का कार्य युद्ध स्तर पर होना चाहिए। सरकार का लक्ष्य सीतामढ़ी को विश्वस्तरीय धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करना है। बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों को किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने और समयसीमा का कड़ाई से पालन करने की हिदायत दी।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी

