मुख्यमंत्री ने किया ‘बिरसा लिब्स इन न्यू भारत’ कार्यक्रम का शुभारंभ, बोले-ज्ञानार्जन से ही संभव है धनार्जन
पटना, 27 मई (हि.स.)। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को पटना स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित ‘संवाद सभागार’ में जनजातीय गरिमा उत्सव-2026 के अंतर्गत आयोजित ‘बिरसा लिब्स इन न्यू भारत’ थीम पर आधारित कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के प्रवेशिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना के लाभुक छात्र-छात्राओं से संवाद किया और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं एवं विकास कार्यक्रमों की जानकारी दी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत और समृद्ध बिहार की परिकल्पना को साकार करने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति के विद्यार्थियों के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना का शुभारंभ अपने आप में ऐतिहासिक पहल है, जो समाज के वंचित तबकों को शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
मुख्यमंत्री ने भगवान बिरसा मुंडा को आदिवासी समाज का महानायक बताते हुए कहा कि देश इस वर्ष उनकी 150वीं जयंती मना रहा है। इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले वर्ष 15 नवंबर को की थी। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने देश की आजादी और आदिवासी समाज के अधिकारों की लड़ाई में ऐतिहासिक योगदान दिया था। उनके आदर्श आज भी समाज को प्रेरित कर रहे हैं।
सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार और झारखंड के विभाजन के बाद बिहार में हरित आवरण काफी कम होकर मात्र 8 से 9 प्रतिशत रह गया था, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य सरकार ने वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए व्यापक अभियान चलाया। इसके परिणामस्वरूप अब बिहार का वन क्षेत्र बढ़कर लगभग 15 प्रतिशत हो गया है और सरकार का लक्ष्य इसे 17 प्रतिशत तक पहुंचाने का है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा राज्य में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों की स्थापना की गई है, जहां बिहार बोर्ड के साथ-साथ सीबीएसई पाठ्यक्रम के आधार पर पढ़ाई कराई जाएगी। इससे अनुसूचित जनजाति समाज के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी और वे राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत लगभग एक लाख चार हजार अनुसूचित जाति एवं जनजाति के छात्र-छात्राओं को लाभ दिया गया है। इनमें 4,155 अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थी शामिल हैं। वहीं प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत इस वर्ष 20 लाख 46 हजार छात्र-छात्राओं को सहायता दी गई है, जिनमें 1 लाख 41 हजार अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थी हैं।
उन्होंने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में भी आदिवासी समाज की बड़ी आबादी (लगभग 20 हजार) निवास करती है और सरकार उनके सामाजिक एवं शैक्षणिक उत्थान के लिए लगातार कार्य कर रही है। प्रत्येक प्रखंड में मॉडल स्कूल खोले जा रहे हैं तथा जुलाई महीने से नए डिग्री कॉलेजों की शुरुआत की जाएगी, ताकि ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर नहीं जाना पड़े।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए शिक्षा सबसे बड़ा माध्यम है। उन्होंने कहा कि “ज्ञानार्जन से ही धनार्जन संभव है” और जीवन में सफलता पाने के लिए शिक्षा अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि अनुसूचित जनजाति समाज के विकास के लिए थरूहट विकास योजना के तहत पश्चिम चंपारण जिले में 180 करोड़ रुपये की विकास योजनाएं संचालित की गई हैं।
मुखयमंत्री ने जनजातीय क्षेत्रों में खेल और प्रतिभा को बढ़ावा देने की घोषणा करते हुए कहा कि सरकार की ओर से मैराथन प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया जाएगा। इसमें प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागी को एक लाख रुपये, द्वितीय को 75 हजार रुपये और तृतीय को 50 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा।
सम्राट चौधरी ने कहा कि कैमूर जिले के अधौरा क्षेत्र, जहां आदिवासी समाज कठिन परिस्थितियों में जीवन व्यतीत कर रहा है, वहां भी डिग्री कॉलेज खोला जाएगा। साथ ही वाल्मीकिनगर और कैमूर में हेलीपोर्ट का निर्माण कराया जाएगा, जिससे इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में होम-स्टे संस्कृति को बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है। इससे पर्यटक आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली को करीब से समझ सकेंगे तथा स्थानीय लोगों की आय में भी वृद्धि होगी।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने उपस्थित छात्र-छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि सरकार आदिवासी समाज की उन्नति, शिक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।--------------
हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी

