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बिहार में कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रही 'कृषि अवसंरचना कोष': विजय कुमार सिन्हा

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बिहार में कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रही 'कृषि अवसंरचना कोष': विजय कुमार सिन्हा


पटना, 16 मई (हि.स.)। बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शनिवार को ‘कृषि अवसंरचना कोष’ (एआईएफ) योजना की प्रगति को लेकर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की और उन्हें आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

बैठक के दौरान कृषि मंत्री ने योजना की प्रगति पर संतोष जताते हुए कहा कि एआईएफ योजना राज्य के कृषि क्षेत्र में बड़े बदलाव का माध्यम बन रही है। उन्होंने कहा कि इस योजना के जरिए बिहार में कृषि आधारभूत संरचना को मजबूत किया जा रहा है तथा किसानों को आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि कृषि अवसंरचना कोष एक केंद्रीय क्षेत्र की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में मध्यम और दीर्घकालिक ऋण वित्तपोषण उपलब्ध कराकर आधारभूत ढांचे का विकास करना है। योजना के तहत फसलों की कटाई के बाद बेहतर प्रबंधन, भंडारण तथा सामुदायिक कृषि परिसंपत्तियों के निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है।

कृषि मंत्री ने जानकारी दी कि 4 नवम्बर 2025 तक बिहार में इस योजना के अंतर्गत कुल 2045 परियोजनाओं को स्वीकृति दी जा चुकी है। इन परियोजनाओं के लिए 1650.37 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है। उन्होंने बताया कि राज्य में सबसे अधिक निवेश भंडारण क्षमता बढ़ाने के क्षेत्र में हुआ है, जहां 834 गोदाम परियोजनाओं को स्वीकृति मिली है। वहीं खेती और कटाई के मशीनीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए 591 परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं।

विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि फसलों के मूल्य संवर्धन को ध्यान में रखते हुए बिहार में 315 प्राइमरी प्रोसेसिंग सेंटर स्थापित किए गए हैं। छोटे और सीमांत किसानों को आधुनिक कृषि उपकरण किराये पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 196 कस्टम हायरिंग सेंटर भी बनाए गए हैं। इसके अलावा योजना के तहत ई-मार्केटिंग प्लेटफॉर्म, साइलो, पैक-हाउस, कोल्ड चेन, लॉजिस्टिक्स सुविधाएं, पकने वाले कक्ष, जैविक इनपुट उत्पादन इकाइयां तथा स्मार्ट एवं सटीक कृषि जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं को भी शामिल किया गया है।

मंत्री ने कहा कि योजना के तहत दो करोड़ रुपये तक के ऋण पर अधिकतम सात वर्षों के लिए तीन प्रतिशत वार्षिक ब्याज छूट दी जाती है। एक आवेदक विभिन्न स्थानों पर अधिकतम 25 परियोजनाएं स्थापित कर सकता है।

उन्होंने बताया कि दो करोड़ रुपये तक के ऋण पर ‘सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी निधि ट्रस्ट’ योजना के तहत क्रेडिट गारंटी कवरेज भी उपलब्ध कराया जाता है। इसकी फीस का भुगतान सरकार अधिकतम सात वर्षों तक करती है, जिससे लाभार्थियों को किसी प्रकार की कोलैटरल या अतिरिक्त गारंटी देने की आवश्यकता नहीं होती।

कृषि मंत्री ने कहा कि योजना के अंतर्गत निवेशकों को कुल परियोजना लागत का न्यूनतम 10 प्रतिशत अंशदान स्वयं करना अनिवार्य है। योजना का दायरा काफी व्यापक है और इसके तहत व्यक्तिगत किसान, निजी संस्थाएं, स्टार्टअप, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), स्वयं सहायता समूह, संयुक्त देयता समूह, पैक्स, मिल मालिक, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां, व्यापारी, भंडारण प्रदाता, स्मार्ट खेती सेवा प्रदाता तथा स्थानीय निकाय एवं पीपीपी परियोजनाएं भी पात्र हैं।

उन्होंने आवेदन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बताते हुए कहा कि इच्छुक लाभार्थी योजना के आधिकारिक पोर्टल www.agriinfra.dac.gov.in पर जाकर पंजीकरण कर सकते हैं और अपनी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट ऑनलाइन जमा कर सकते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी