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राजस्व अधिकारियों की दो टूक- सर कटा सकते हैं, झुकेंगे नहीं, सरकार ने भी दिखाए तेवर

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राजस्व अधिकारियों की दो टूक- सर कटा सकते हैं, झुकेंगे नहीं, सरकार ने भी दिखाए तेवर


- हड़ताल पर आमने-सामने सरकार और अधिकारी, पटना महाजुटान से बढ़ा तनाव

- पटना महाजुटान में हुंकार, हड़ताल जारी रखने का ऐलान

पटना, 01 अप्रैल (हि.स.)। बिहार में राजस्व पदाधिकारियों की हड़ताल के बीच सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा संदेश दिया है। उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि जो अधिकारी काम पर लौटेंगे, उन्हें मुख्यालय में पदस्थापित किया जाएगा। जबकि सेवानिवृत्त सीओ को दो अंचलों का प्रभार दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि काम पर लौटने वाले अधिकारियों को सुरक्षा और सम्मान मिलेगा। वहीं डराने-धमकाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता का काम हर हाल में जारी रहेगा। उन्होंने बीएनएस और आईटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की चेतावनी दी है। कहा कि व्हाट्सएप व सोशल मीडिया पर धमकी देने वालों पर भी सख्ती होगी। सभी जिलाधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अब तक 24 अधिकारी काम पर लौट चुके हैं। इससे प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत हुआ है।

इधर, पटना में बिहार राजस्व सेवा के पदाधिकारियों का महाजुटान हुआ। इसमें बड़ी संख्या में अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बिहार राजस्व सेवा संयुक्त महासंघ के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में करीब 700 से अधिक अधिकारी मौजूद रहे। जबकि 1200 से ज्यादा अधिकारियों के आंदोलन से जुड़े होने का दावा किया गया। महाजुटान में अधिकारियों ने सरकार के खिलाफ खुलकर नाराजगी जताई और दो टूक कहा कि सर कटा सकते हैं, लेकिन सर झुका नहीं सकते। अधिकारियों का कहना है कि यह उनकी अंतरात्मा की आवाज है और वे किसी भी दबाव में झुकने वाले नहीं हैं।

अधिकारियों ने अपनी मुख्य मांग रखते हुए कहा कि बिहार राजस्व सेवा नियमावली के तहत पदोन्नति और डीसीएलआर जैसे पदों पर राजस्व सेवा के अधिकारियों की ही नियुक्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद सरकार उसका अनुपालन नहीं कर रही है।

महाजुटान में वक्ताओं ने यह भी कहा कि उनकी मांग पूरी तरह सेवा संबंधी और न्यायसंगत है। इसका उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता, पारदर्शिता और बेहतर राजस्व व्यवस्था सुनिश्चित करना है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मांग को किसी भी तरह से भ्रष्टाचार विरोधी प्रयासों के खिलाफ बताना गलत है। वहीं, अधिकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार उनकी मांगों पर विचार करने के बजाय सामूहिक अवकाश पर गए अधिकारियों को डराने और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई कर रही है, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन है।

गौरतलब है कि विभाग ने 25 मार्च 2026 की शाम 5 बजे तक हड़ताल समाप्त कर काम पर लौटने का निर्देश दिया था, लेकिन इसका व्यापक असर नहीं दिखा। हालांकि जो अधिकारी लौटे हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर जिम्मेदारी देने का निर्णय लिया गया है।

महाजुटान के अंत में सभी अधिकारियों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे अपनी मांगों को शांतिपूर्ण, वैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ाते रहेंगे। जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं और न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं किया जाता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। फिलहाल, बिहार में सरकार और राजस्व पदाधिकारियों के बीच टकराव तेज हो गया है। इसका असर प्रशासनिक कामकाज और आम जनता की सेवाओं पर पड़ता दिखाई दे रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ .राजेश