कम्प्यूटर शिक्षा से छात्राओं के सपनों को मिली नई उड़ान
सुपौल, 06 अगस्त (हि.स.)। सरस्वती विद्या निकेतन प्लस टू विद्यालय, वीरपुर में नियमित कम्प्यूटर कक्षाओं की शुरुआत ने छात्राओं के भीतर सीखने का नया उत्साह जगा दिया है। आधुनिक शिक्षा की दिशा में उठाए गए इस कदम से छात्राओं को विद्यालय परिसर में ही डिजिटल तकनीक सीखने का अवसर मिल रहा है, जिससे उनके आत्मविश्वास के साथ-साथ भविष्य की संभावनाएं भी मजबूत हो रही हैं। विद्यालय की कम्प्यूटर प्रयोगशाला में नियमित प्रशिक्षण के दौरान छात्राएं पूरी लगन के साथ नई तकनीक सीख रही हैं। उनका कहना है कि अब कम्प्यूटर शिक्षा के लिए बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
विद्यालय में ही यह सुविधा उपलब्ध होने से समय की बचत हो रही है और पढ़ाई भी अधिक प्रभावी बन रही है। छात्राओं का मानना है कि कम्प्यूटर का ज्ञान उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के क्षेत्र में उन्हें नई पहचान दिलाने में सहायक होगा।छात्राओं ने अनुमंडल पदाधिकारी विनय कुमार की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे उनके जीवन में नई उम्मीद जगी है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में डिजिटल शिक्षा की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है और ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं के लिए विद्यालय में नियमित कम्प्यूटर कक्षाओं का संचालन किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। इसके लिए उन्होंने अनुमंडल प्रशासन के प्रति आभार भी व्यक्त किया।विद्यालय प्रबंधन ने भी इस पहल को शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण प्रयास बताया। प्रबंधन का कहना है कि डिजिटल शिक्षा से छात्राओं का बौद्धिक और तकनीकी विकास होगा तथा वे बदलते समय की चुनौतियों के अनुरूप स्वयं को बेहतर ढंग से तैयार कर सकेंगी।
इस पहल की सबसे प्रेरक तस्वीर तब सामने आई, जब रविवार और अन्य अवकाश के दिनों में भी कई छात्राएं स्वेच्छा से कम्प्यूटर सीखने विद्यालय पहुंचीं। बच्चियों की सीखने की लगन देखकर अनुमंडल पदाधिकारी विनय कुमार ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बच्चों के भीतर प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल सही अवसर और संसाधन उपलब्ध कराने की है। उन्होंने बताया कि जिला पदाधिकारी का भी मानना था कि यदि यह प्रयास कुछ बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सके, तो यह बड़ी सफलता होगी। आज छात्राओं का उत्साह इस सोच को सार्थक साबित कर रहा है।
विद्यालय में शुरू हुई नियमित कम्प्यूटर शिक्षा केवल तकनीकी प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं में आत्मविश्वास बढ़ाने और उनके सपनों को नई दिशा देने का माध्यम भी बन रही है। छात्राओं की बढ़ती भागीदारी यह संकेत दे रही है कि अवसर मिलने पर ग्रामीण परिवेश की बेटियां भी डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में नई मिसाल कायम कर सकती हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र

