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कछुआ गति से हो रहा भोलानाथ फ्लाईओवर का निर्माण, अब जून 2027 तक पूरा होने की उम्मीद

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कछुआ गति से हो रहा भोलानाथ फ्लाईओवर का निर्माण, अब जून 2027 तक पूरा होने की उम्मीद


भागलपुर, 27 जुलाई (हि.स.)। शहर को भीषण जाम और जलजमाव की समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए बन रहा मिरजानहाट शीतला स्थान से भीखनपुर गुमटी नंबर तीन के बीच का बहुप्रतीक्षित भोलानाथ रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) स्थानीय निवासियों के लिए जी का जंजाल बन चुका है।

निर्माण कार्य की बेहद धीमी गति के कारण इस रूट पर प्रतिदिन हजारों लोगों को भारी ट्रैफिक जाम, उड़ती धूल और जलभराव की गंभीर समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, इस 1393 मीटर लंबे फ्लाईओवर का निर्माण कार्य 20 जून 2023 को शुरू किया गया था। इसे दो वर्षों के भीतर यानी जून 2025 तक पूरा करने का शुरुआती करार था। हालांकि, निर्माण एजेंसी (श्रीराम एंटरप्राइजेज) और विभाग की लापरवाही के कारण यह पहली समयसीमा फेल हो गई। इसके बाद लक्ष्य को बढ़ाकर जून 2026 किया गया, लेकिन काम की रफ्तार न सुधरने के कारण यह डेडलाइन भी बेअसर साबित हुई। हाल ही में बिहार विधानसभा में भागलपुर के स्थानीय विधायक रोहित पाण्डेय द्वारा उठाए गए सवाल के लिखित जवाब में सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब इस परियोजना को 30 जून 2027 तक पूरा करने का अंतिम लक्ष्य (डेडलाइन) तय किया गया है। जब इस फ्लाईओवर के निर्माण की योजना बनी थी, तब इसकी प्रारंभिक लागत राशि 59 करोड़ आंकी गई थी। लेकिन दो मुख्य रेलवे लाइनों के ऊपर से गुजरने के कारण इसकी लंबाई करीब 125 मीटर बढ़ानी पड़ी और एप्रोच रोड के लिए अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण की जरूरत पड़ी। वर्तमान में इस पूरी परियोजना की संशोधित लागत 87 करोड़ तक पहुंच चुकी है। इसमें से करीब 54 करोड़ की राशि केवल प्रभावित रैयतों को भूमि मुआवजे के तौर पर दी जानी है। पुल निर्माण निगम के अधिकारियों और प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, काम के लटकने की दो मुख्य वजहें हैं। भोलानाथ और बौंसी रेलवे लाइन के ऊपर से गुजरने के कारण रेलवे से 'स्ट्रक्चरल ड्राइंग' और एनओसी मिलने में लंबा वक्त लगा। हालांकि, लंबे समय से लंबित इस बाधा को अब काफी हद तक सुलझा लिया गया है। वहीं फ्लाईओवर के अप्रोच रोड के लिए वार्ड 37, 46 और 48 में कुल 60 डेसिमल जमीन का अधिग्रहण अब तक अंतिम चरण में ही लटका है, जिससे मुख्य सड़क का जुड़ाव नहीं हो पा रहा है। विभाग के अनुसार, अब तक फ्लाईओवर का करीब 96 प्रतिशत फाउंडेशन कार्य, 76 प्रतिशत सब-स्ट्रक्चर और 60 प्रतिशत सुपर-स्ट्रक्चर का काम पूरा किया जा चुका है। निर्माण स्थल के आसपास के दुकानदारों और निवासियों का कहना है कि तीन साल से रास्ता बंद होने के कारण उनका व्यापार ठप हो गया है। हल्की बारिश होते ही अंडरपास का गंदा पानी लोगों के घरों में घुस जाता है। स्थानीय नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने युद्धस्तर पर काम चलाकर जल्द से जल्द वैकल्पिक मार्ग या सर्विस रोड की व्यवस्था नहीं की, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर