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बीडीओ की सुरक्षा को लेकर राज्यभर में विरोध, सुपौल में भी काली पट्टी बांधकर कर रहे कार्य

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बीडीओ की सुरक्षा को लेकर राज्यभर में विरोध, सुपौल में भी काली पट्टी बांधकर कर रहे कार्य


सुपौल, 27 जुलाई (हि.स.)। छपरा में विधि-व्यवस्था ड्यूटी के दौरान दो प्रखंड विकास पदाधिकारियों (बीडीओ) के गंभीर रूप से घायल होने की घटना के बाद बिहार में अधिकारियों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठने लगा है। बिहार ग्रामीण विकास सेवा संघ के आह्वान पर 27 जुलाई से राज्यभर के बीडीओ काली पट्टी बांधकर नियमित सरकारी कार्यों का निर्वहन करते हुए प्रतीकात्मक विरोध जता रहे हैं। सुपौल के प्रखंड विकास पदाधिकारी निशांत कुमार ने इसकी पुष्टि की है।

बिहार ग्रामीण विकास सेवा संघ ने मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपकर प्रखंड विकास पदाधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। संघ का कहना है कि विधि-व्यवस्था जैसी संवेदनशील ड्यूटी के दौरान पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने से अधिकारियों को जान का जोखिम उठाना पड़ता है। ज्ञापन में प्रत्येक प्रखंड कार्यालय में बॉडी प्रोटेक्टर, हेलमेट, शील्ड, लेग गार्ड सहित अन्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इसके अलावा प्रत्येक बीडीओ के साथ कम-से-कम दो प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की प्रतिनियुक्ति सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया गया है।

संघ ने ड्यूटी के दौरान घायल होने वाले अधिकारियों के लिए उच्च स्तरीय सरकारी अस्पतालों में निशुल्क उपचार, विशेष बीमा एवं क्षतिपूर्ति व्यवस्था लागू करने की मांग की है। साथ ही संवेदनशील विधि-व्यवस्था ड्यूटी के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने की आवश्यकता भी जताई गई है।

संघ ने छपरा की घटना की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और दोषियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की भी मांग की है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

प्रखंड विकास पदाधिकारी निशांत कुमार ने बताया कि संघ के निर्णय के अनुसार राज्यभर के सभी बीडीओ काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रतीकात्मक आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार सुरक्षा, उपचार और अन्य मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती।संघ का कहना है कि प्रखंड विकास पदाधिकारी सरकार की विकास योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उन्हें सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि सरकार उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगी।

हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र