कम लागत में अधिक मुनाफा देगा मड़ुआ, बखरी में हुआ फसल कटनी प्रयोग
कटिहार, 01 नवंबर (हि.स.)। कृषि उत्पादकता के वैज्ञानिक आकलन और किसानों को पौष्टिक वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से रविवार को राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्र, बखरी में मड़ुआ (रागी/फिंगर मिलेट) फसल का कटनी प्रयोग संपन्न हुआ। जिला कृषि पदाधिकारी (डीएओ) राजीव कुमार की उपस्थिति में कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय अधिकारियों ने निर्धारित वैज्ञानिक पद्धति के तहत यह प्रयोग संपादित कराया।
प्रयोग के दौरान वास्तविक उपज के सटीक मूल्यांकन के लिए 10 मीटर गुणा 5 मीटर (कुल 50 वर्गमीटर) का क्रॉप कटिंग क्षेत्र चिन्हित कर फसल की कटाई की गई। इसका मुख्य उद्देश्य प्रति इकाई क्षेत्रफल से प्राप्त वास्तविक उत्पादन के आंकड़े एकत्र करना है, ताकि कृषि सांख्यिकी और भविष्य के उत्पादन अनुमानों को प्रामाणिक बनाया जा सके।
मौके पर जिला कृषि पदाधिकारी राजीव कुमार ने कहा कि मड़ुआ केवल एक पारंपरिक खाद्यान्न नहीं, बल्कि भविष्य की पोषण सुरक्षा और टिकाऊ कृषि का मजबूत आधार है। बदलते मौसम चक्र और घटते जल संसाधनों के बीच यह कम पानी और न्यूनतम लागत में तैयार होने वाली सूखा प्रतिरोधी फसल है। उन्होंने बताया कि रागी कैल्शियम, आयरन और प्रचुर डाइटरी फाइबर से भरपूर होने के साथ प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन मुक्त है, जिससे यह आम लोगों के साथ-साथ मधुमेह रोगियों के आहार के लिए भी बेहद लाभकारी है। वर्तमान में रागी से आटा, सत्तू, दलिया के अलावा बिस्कुट, लड्डू और हलवा जैसे कई मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार कर किसान अतिरिक्त मुनाफा कमा सकते हैं।
डीएओ ने जिले के किसानों से अपील की कि वे फसल विविधीकरण के तहत अपने फसल चक्र में मड़ुआ सहित अन्य मोटे अनाजों (मिलेट्स) को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि प्रमाणित बीज, समय पर बुवाई और संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाकर किसान कम लागत में बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं।
इस अवसर पर उप निदेशक कृषि अभियंत्रण, अनुमंडल कृषि पदाधिकारी कटिहार, प्रखंड कृषि पदाधिकारी (प्रक्षेत्र), प्रखंड कृषि पदाधिकारी (बीज विश्लेषण) एवं प्रखंड कृषि पदाधिकारी समेली सहित अन्य कृषि कर्मी उपस्थित थे।
हिन्दुस्थान समाचार / विनोद सिंह

