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शुरुआती बढ़त सर्वेश की, अंतिम बाजी अनिल झा के नाम; दूसरी वरीयता ने पलटी तस्वीर

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शुरुआती बढ़त सर्वेश की, अंतिम बाजी अनिल झा के नाम; दूसरी वरीयता ने पलटी तस्वीर


दरभंगा, 29 अक्टूबर (हि.स.)।

बिहार विधान परिषद के दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव परिणाम इस बार लंबे इंतजार, उतार-चढ़ाव और रोमांचक मतगणना के कारण प्रदेश की राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गया। भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी सर्वेश कुमार और राजद समर्थित अनिल कुमार झा के बीच मुकाबला इतना करीबी रहा कि पहली वरीयता के मतों की गिनती पूरी होने के बाद भी हार-जीत का फैसला नहीं हो सका। अंततः दूसरी वरीयता के मतों की गणना में समीकरण बदला और तारडीह प्रखंड के ठेंगहा गांव निवासी अनिल कुमार झा की जीत की सूचना से उनके समर्थकों में उत्साह की लहर दौड़ गई।

मतगणना के शुरुआती चरणों से लेकर बुधवार देर रात तक सर्वेश कुमार बढ़त बनाए हुए थे। बुधवार रात प्रथम वरीयता की गिनती पूरी होने पर भाजपा प्रत्याशी को 16,115 मत मिले थे, जबकि अनिल कुमार झा को 14,615 मत प्राप्त हुए थे। इस प्रकार पहली वरीयता में सर्वेश कुमार 1,500 मतों से आगे थे। जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी मोहम्मद इम्तियाज नूरानी 10,227 मतों के साथ तीसरे स्थान पर थे। किसी भी प्रत्याशी को निर्धारित कोटा नहीं मिलने के कारण मतगणना दूसरी वरीयता के मतों की गणना तक पहुंची।

कुल 69,141 मतपत्रों की गिनती में 63,820 मत वैध और 5,321 मत अवैध पाए गए। जीत के लिए 31,911 मतों का कोटा निर्धारित था। इस कारण कम मत प्राप्त करने वाले प्रत्याशियों को क्रमशः बाहर करते हुए उनके मतपत्रों पर अंकित अगली वरीयता के अनुसार मतों का हस्तांतरण किया गया। इसी प्रक्रिया ने मुकाबले को अंतिम समय तक रोमांचक बनाए रखा।

प्रथम वरीयता में लगातार बढ़त बनाए रखने के बावजूद सर्वेश कुमार निर्धारित कोटा हासिल नहीं कर सके। दूसरी ओर, अनिल कुमार झा के लिए मतगणना के अंतिम चरण निर्णायक साबित हुए। स्थानीय स्तर पर मिली सूचना के अनुसार, अंतिम चरणों में अनिल झा ने बढ़त बनानी शुरू की और अंततः जीत हासिल की। हालांकि जीत का आधिकारिक अंतर तथा अंतिम प्रत्याशीवार मतों का पूरा विवरण निर्वाचन पदाधिकारी की घोषणा से ही प्रमाणित माना जाएगा।

यह मुकाबला क्रिकेट के टी-20 मैच के अंतिम ओवर की तरह रहा, जहां आखिरी गेंद तक दर्शकों की सांसें थमी रहती हैं। शुरुआती बढ़त से लेकर अंतिम परिणाम तक दोनों प्रत्याशियों के समर्थक लगातार अपने-अपने पक्ष की जीत की उम्मीद लगाए रहे। बिहार की अन्य विधान परिषद सीटों के परिणाम सामने आने के बाद भी दरभंगा स्नातक सीट पर मतगणना जारी रहने से इसकी चर्चा और बढ़ गई।

मतगणना में देरी और लगातार बदलते रुझानों के बीच राजनीतिक तनाव भी देखने को मिला। मतगणना केंद्र पर कुछ एजेंटों को हिरासत में लिए जाने की खबरों के बाद राजद खेमे में नाराजगी बढ़ी। राजद नेताओं ने मतगणना प्रक्रिया पर सवाल उठाए और आंदोलन की चेतावनी दी। तेजस्वी यादव तथा पूर्व मंत्री ललित कुमार यादव की ओर से लोकतांत्रिक प्रक्रिया और निष्पक्षता को लेकर जताई गई चिंताओं ने भी इस चुनाव को राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना दिया।

जिला प्रशासन ने कड़ी निगरानी में मतगणना प्रक्रिया संचालित की। लंबे समय तक चली गणना, प्रत्याशियों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी और तनावपूर्ण माहौल के बीच चुनाव कर्मियों को लगातार सतर्क रहना पड़ा। प्रशासन की भूमिका का अंतिम मूल्यांकन आधिकारिक प्रक्रिया और किसी भी दर्ज शिकायत के निस्तारण के आधार पर होना चाहिए। इस चुनाव ने यह भी दिखाया कि संवेदनशील राजनीतिक परिस्थितियों में पारदर्शिता, स्पष्ट सूचना और समयबद्ध संवाद कितना महत्वपूर्ण है।

ठेंगहा से विधान परिषद तक का सफर

तारडीह प्रखंड के ठेंगहा गांव के निवासी अनिल कुमार झा का राजनीतिक सफर संघर्षपूर्ण रहा है। स्थानीय स्तर पर उन्हें मिलनसार, जुझारू और विभिन्न सामाजिक वर्गों के लोगों से संपर्क रखने वाले व्यक्ति के रूप में जाना जाता है। इससे पहले कई चुनावों में उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा था। ऐसे में इस चुनाव में मिली सफलता उनके लिए पहली बड़ी चुनावी जीत मानी जा रही है।

उनकी सामाजिक स्वीकार्यता को इस मुकाबले का एक महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है। चुनावी चर्चा में यह बात भी सामने आई कि उन्हें केवल राजद समर्थक मतदाताओं का ही नहीं, बल्कि अन्य सामाजिक समूहों के कुछ मतदाताओं का भी समर्थन मिला। हालांकि जाति या समुदाय के आधार पर किस प्रत्याशी को कितने मत मिले, इसका प्रमाणित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। इसलिए किसी विशेष समुदाय के मतदान व्यवहार के बारे में निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / Krishna Mohan Mishra