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सीमांचल में नकली खाद के खतरे पर कृषि विभाग अलर्ट, किसानों को सतर्क रहने की अपील

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किशनगंज, 28 अक्टूबर (हि.स.)। सीमावर्ती किशनगंज जिले में रबी फसलों की बुआई के मौसम में नकली और मिलावटी उर्वरक की आशंका को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को सतर्क किया है। जिले में बड़े पैमाने पर मक्का की खेती होती है, जिसके कारण यूरिया, डीएपी और अन्य फॉस्फेटिक उर्वरकों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में किसानों को असली खाद खरीदने और धोखाधड़ी से बचने के लिए जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है।

किशनगंज की भौगोलिक स्थिति इसे संवेदनशील बनाती है। जिले के ठाकुरगंज, टेढ़ागाछ और दिघलबैंक प्रखंड नेपाल की सीमा से सटे हैं, जबकि किशनगंज, पोठिया और ठाकुरगंज पश्चिम बंगाल की सीमा साझा करते हैं। कृषि विभाग के अनुसार, सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण उर्वरकों की तस्करी और नकली खाद की बिक्री की आशंका बनी रहती है। मिलावटी उर्वरक में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्व कम या अनुपस्थित हो सकते हैं। इससे फसल की वृद्धि प्रभावित होती है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

कृषि विभाग ने किसानों को हमेशा पंजीकृत और अनुज्ञप्तिधारी विक्रेताओं से ही उर्वरक खरीदने की सलाह दी है। खरीद के बाद पीओएस मशीन से जारी कैश मेमो या रसीद अवश्य लें। खाद की बोरी पर छपे विवरण, सिलाई और सील की जांच करें।कटी-फटी या दोबारा सिली हुई बोरी खरीदने से बचें।विभाग ने डीएपी, यूरिया और एमओपी की पहचान के लिए कुछ पारंपरिक जांच के तरीके भी बताए हैं। हालांकि, केवल घरेलू परीक्षण के आधार पर खाद की असलियत तय करना पर्याप्त नहीं है। किसी भी तरह का संदेह होने पर कृषि विभाग से जांच कराने की सलाह दी गई है।

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि नकली उर्वरक मिलने या किसी विक्रेता द्वारा इसकी बिक्री किए जाने की जानकारी मिलने पर तत्काल संबंधित कृषि समन्वयक, प्रखंड कृषि पदाधिकारी अथवा जिला कृषि कार्यालय को सूचित करें। इसके लिए जिला कृषि कार्यालय, किशनगंज के कंट्रोल रूम का मोबाइल नंबर 06456-295270 जारी किया गया है। विभाग का उद्देश्य किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराना और उनकी फसल व मेहनत की कमाई को नुकसान से बचाना है।

हिन्दुस्थान समाचार / धर्मेन्द्र सिंह